आर्य समाज से जुडने एवं महर्षि दयानन्द का अनुयायी बनने का लाभ
भूत, प्रेत, जिन्न, पिशाच, चुड़ैल का डर समाप्त।
चमत्कारी, बंगाली बाबाओं की जरूरत नहीं पड़ती।
टोने टोटके का डर नही रहता।
कोई पाखंडी हमारे परिवार को शिकार नहीं बना सकता।
मुहूर्त, दिशा-शूल, शुभ-अशुभ से छुटकारा ।
नवग्रहों को मनाने का झंझट समाप्त ।
तान्त्रिक दूर भागने लगते हैं, शनि देव का भय समाप्त ।
तंत्र-मंत्र, झाड़-फूँक, श्री यंत्र, धन-लक्ष्मी यंत्र, गंडे-ताबीज की जरूरत समाप्त ।
पीर, मजारों, साईं, दरगाहों से मन्नत मांगने की जरूरत नहीं पड़ती।
विवाह सम्बन्ध में मांगलिक दोष आड़े नहीं आता।
कोई देवी, माता, बाबा सिर नहीं चढ़ते ।
ईश्वर का आशीर्वाद हमेशा बना रहता है।
कर्म फल की ईश्वरीय व्यवस्था की जानकारी होने से अब कोई धोखा नहीं दे सकता, पढ़ें सत्यार्थ प्रकाश










