वैसाखी पर जलियांवाला बाग के शहीदों को श्रद्धांजलि: एक प्रेरणास्पद आयोजन
नोएडा के आर्य समाज अरुण विहार एवं सेक्टर 33 द्वारा आयोजित वैसाखी पर्व का यह विशेष आयोजन इतिहास के एक अत्यंत दर्दनाक और प्रेरणास्पद क्षण—जलियांवाला बाग हत्याकांड—की स्मृति में समर्पित था। 13 अप्रैल 1919 को निहत्थे भारतीयों पर अंग्रेज़ी सेना द्वारा किए गए इस नरसंहार ने देशभर में आज़ादी की भावना को प्रज्वलित कर दिया था। इस ऐतिहासिक घटना की याद में श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उपस्थित जनों ने राष्ट्र रक्षा के संकल्प को दोहराया।

राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल आर्य का ओजस्वी वक्तव्य
केन्द्रीय आर्य युवक परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अनिल आर्य ने अपने विचार रखते हुए कहा कि जलियांवाला बाग कांड केवल एक त्रासदी नहीं, बल्कि भारतीय आत्मबल और जागृति का प्रतीक है। यह घटना भारत के हर कोने में ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ ज्वाला बनकर फूटी और स्वतंत्रता संग्राम को गति मिली। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि इस बलिदान को केवल स्मरण तक सीमित न रखें, बल्कि देश सेवा और संस्कृति रक्षा का संकल्प लें।
हनुमान जयंती पर वैदिक दृष्टिकोण
कार्यक्रम में हनुमान जयंती का भी विशेष महत्व रहा। वैदिक विद्वान डॉ. जयेन्द्र आचार्य ने अपने सारगर्भित उद्बोधन में श्री हनुमान जी को वेदों का प्रकांड विद्वान बताते हुए कहा कि उन्हें ‘वानर’ कहना उनकी महिमा का अवमूल्यन है। उन्होंने श्री हनुमान जी की ज्ञान, निष्ठा और सेवा भावना को आज के युग के लिए प्रेरणास्रोत बताया।

भारतीय संस्कृति पर गर्व
बहिन गायत्री मीना ने भावपूर्ण शब्दों में युवाओं को अपने महापुरुषों से प्रेरणा लेने और भारतीय संस्कृति पर गर्व करने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि आत्मगौरव की भावना ही किसी राष्ट्र की असली शक्ति होती है।
कार्यक्रम संचालन एवं समापन
समारोह का संचालन आर्य नेता कर्नल कर्ण खरब ने सुचारु रूप से किया, जिन्होंने सभा को अनुशासित और प्रेरणादायक बनाए रखा। अंत में मंत्री कर्नल संजय खरबंदा ने सभी आगंतुकों का धन्यवाद ज्ञापन कर कार्यक्रम का समापन किया।

निष्कर्ष
यह आयोजन केवल श्रद्धांजलि का अवसर नहीं था, बल्कि यह एक सामाजिक और सांस्कृतिक जागरण का मंच भी था। आर्य समाज द्वारा किया गया यह प्रयास नई पीढ़ी को देशभक्ति, संस्कृति, और वैदिक मूल्यों से जोड़ने की दिशा में एक सराहनीय कदम है।
साभार: प्रवीण आर्य










