आर्य समाज ने मनाई महर्षि दयानंद जी की जयंती: बिलासपुर

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आर्य समाज के लोगों ने मनाई महर्षि दयानंद सरस्वती जी के योगदान को किया याद –

स्वामी दयानंद ने समाज को कुरीतियों से मुक्त कर वेदों के शुद्ध ज्ञान को पहुंचाया


📍 बिलासपुर: आर्य समाज गोंडपारा द्वारा महर्षि दयानंद सरस्वती जी की 201वीं जन्म जयंती बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाई गई। यह आयोजन हिंदी तिथि के अनुसार फाल्गुन कृष्ण दशमी के पावन अवसर पर दयानंद चौक, अशोक नगर, सीपत रोड सरकंडा में संपन्न हुआ। इस भव्य कार्यक्रम में वैदिक हवन, भजन, प्रवचन और प्रसाद वितरण का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में नगरवासी और आर्य समाज के पदाधिकारी उपस्थित रहे।


🔥 कार्यक्रम की शुभ शुरुआत – वैदिक हवन

🌅 सुबह 9 बजे कार्यक्रम का शुभारंभ वैदिक हवन से हुआ। इस हवन में आर्य समाज के पुरोहित मनीष शास्त्री ने वेद मंत्रों की सहायता से यजमानों को आहुतियां दिलवाईं। हवन के मुख्य यजमान रेखा ओम प्रकाश पांडे (नवनिर्वाचित पार्षद, अशोक नगर वार्ड) और (आर्य समाज गोडपारा के मंत्री) विनय निधि गुप्ता थे।

🪔 हवन के दौरान पवित्र वैदिक मंत्रों का उच्चारण किया गया, जिससे पूरे वातावरण में शुद्धता और आध्यात्मिकता का संचार हुआ।


🇮🇳 महर्षि दयानंद: स्वतंत्रता संग्राम के प्रथम बिगुल वादक

🎤 कार्यक्रम के मुख्य अतिथि ओम प्रकाश पांडे ने अपने ओजस्वी भाषण में कहा:

“महर्षि दयानंद सरस्वती केवल एक समाज सुधारक ही नहीं थे, बल्कि वे एक सच्चे देशभक्त भी थे। 1857 की क्रांति में उन्होंने ही सबसे पहले स्वतंत्रता की बिगुल बजाई थी। उनके विचारों से प्रेरित होकर हजारों देशभक्तों ने अपने प्राणों की आहुति दी और देश को स्वतंत्रता दिलाने में योगदान दिया।”

📖 महर्षि दयानंद सरस्वती ने ‘स्वराज्य’ का पहला नारा दिया और अन्य स्वतंत्रता सेनानियों के लिए प्रेरणास्त्रोत बना।


📜 महर्षि दयानंद: वेदों के पुनर्जागरण के अग्रदूत

🎼 भजन संध्या के दौरान, अवधेश गुप्ता और उनकी मंडली ने मधुर भजनों की प्रस्तुति दी, जिससे श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे।

📚 इसके बाद, मनीष शास्त्री ने अपने प्रवचन में कहा:

“महर्षि दयानंद जी ने विलुप्त होते वेदों को पुनर्जीवित किया और समाज को अंधविश्वास व कुरीतियों से मुक्त करने का मार्ग दिखाया। उनके प्रयासों के कारण आज हम वेदों का पठन-पाठन कर पा रहे हैं।”

🔅 महर्षि दयानंद ने ‘सत्यार्थ प्रकाश’ नामक ग्रंथ की रचना की, जिसमें उन्होंने वेदों के शुद्ध ज्ञान को प्रस्तुत किया और समाज को सत्य, अहिंसा, शिक्षा और स्वच्छता का संदेश दिया।


🤝 कार्यक्रम में इनका रहा सहयोग

🎶 कार्यक्रम के अंत में, आर्य समाज के प्रधान सुधीर गुप्ता ने प्रेरणादायक गीत प्रस्तुत किया।

🙏 समस्त आयोजन का संयोजन और संचालन सिद्धार्थ गुप्ता ने किया, जिन्होंने सभी अतिथियों और उपस्थित जनसमुदाय का आभार व्यक्त किया।

🕊️ कार्यक्रम का समापन शांति पाठ और जोशीले जय घोष के साथ हुआ:

“वेदों की ओर लौटो!”

📢 इस भव्य आयोजन में नगर के गणमान्य नागरिकों, आर्य समाज के पदाधिकारियों और श्रद्धालु भक्तों की सक्रिय भागीदारी रही।


🌿 निष्कर्ष

✍🏻 महर्षि दयानंद सरस्वती जी का जीवन सत्य, धर्म, और राष्ट्रभक्ति की मिसाल है। उनका उद्देश्य समाज को अज्ञान, अंधविश्वास और कुरीतियों से मुक्त कर वेदों के सत्य ज्ञान की ओर ले जाना था। इस अवसर पर, सभी श्रद्धालुओं ने महर्षि दयानंद के सिद्धांतों को आत्मसात करने और समाज में जागरूकता फैलाने का संकल्प लिया।

🌞 “धर्म की जय हो, अधर्म का नाश हो!”

“आर्य समाज आगे बढ़े”