कृण्वन्तो विश्वमार्यम् पूरा विश्व आर्य (श्रेष्ठ) बने आर्य समाज किरतपुर के 77 वे वार्षिक उत्सव समारोह व महर्षि दयानन्द सरस्वती जी के 200 वीं जयन्ती वर्ष के उपलक्ष्य में निमन्त्रण पत्र –
प्रचार सेवा :-आर्य ज्वैलर्स सिविल लाइन्स बिजनौर व मौहल्ला झण्डा, किरतपुर के सौजन्य से

ओं विश्वानि देव सवितर्दुरितानी परा सुव । यद् भद्रं तन्न आ सुव ॥
अर्थ – हे सकल जगत के उत्पत्तिकर्ता, समग्र, ऐश्वर्ययुक्त, शुद्ध स्वरूप, सब सुखो के दाता परमेश्वर आप कृपा करके हमारे सम्पूर्ण दुर्गुण, दुर्व्यसन और दुखो को दूर कर दीजिये और जो कल्याण कारक गुण, कर्म, स्वभाव और पदार्थ है, वह सब हमको प्रदान कीजिए।
कार्यक्रम – 20 अगस्त दिन रविवार से 25 अगस्त दिन शुक्रवार तक ।
शोभा यात्रा :-20 अगस्त को 3 बजे से आर्य समाज से प्रारम्भ होगी
21 अगस्त से 25 अगस्त तक
प्रातः – 7:30 से 10 बजे तक यज्ञ, भजन व प्रवचन
मध्यान्ह – 3:30 बजे से 6 बजे तक भजन व प्रवचन
रात्रि – 8 बजे से 10:30 बजे तक भजन व प्रवचन
25 अगस्त को समापन समारोह के उपरान्त आप स्नेह भोज के लिऐ सादर आमंत्रित है ।
आमंत्रित विद्वान जन –
श्री डा0 वागेश जी (प्राचार्य गुरूकुल ऐटा)
श्री पंडित उमेश चन्द्र कुलश्रेष्ठ जी (आगरा)
श्री पंडित दिनेश चन्द्र पथिक जी (अमृतसर)
श्री पंडित भीष्म आर्य
हम क्या थे क्या हो गये
आदरणीय बन्धुवर व मातृ शक्ति को सादर नमस्ते
श्री राम व श्री कृष्ण हमारी सभ्यता के दो प्रमुख स्तम्भ है आज यह हमारी आवश्यकता है कि श्री राम व श्री कृष्ण के द्वारा पालन किये गये मार्ग का हम सब भी अनुशरण करें श्री राम का जन्म पुत्रेष्टी यज्ञ के परिणाम स्वरूप हुआ जो एक वेद सम्मत यज्ञ है श्री राम युवा अवस्था मे ही ऋषियों व यज्ञ की रक्षा हेतू वनो मे गये श्री राम ने अपने जीवन में हर महत्वपूर्ण अवसर पर वैदिक अनुष्ठान किये। श्री कृष्ण एक महान दार्शनिक चारों वेदो के ज्ञाता थे उनका पूरा जीवन वेदो के अनुकूल व्यतीत हुआ, गीता में श्री कृष्ण द्वारा दिये गये उपदेशो में वेदो की वाणी की स्पष्ट छाप है। एक लम्बे समय तक ज्ञात अज्ञात कारणों से समाज में धूर्त पाखण्डी वामवार्णियों व विधर्मियो का वर्चस्व समाज के ऊपर रहा जिस के परिणाम स्वरूप हम धर्म के वास्तविक स्वरूप को छोड़ कर उस पथ पर चल पड़े जो कभी हमारा था ही नही अनेको ऐसी पुस्तकों का निर्माण किया गया जिनमें हमारे महापुरुषों का घोर अपमान किया गया काल्पनिक कथाओं का चित्रण हमे नीचा दिखाने को किया गया हमारे धर्म ग्रन्थों के वास्तविक अर्थो का अनर्थ किया गया।
इस सब से बाहर निकल कर समाज में धर्म के वास्तविक शुद्ध स्वरूप को स्थापित करने के लिऐ महर्षि दयानन्द सरस्वती जी ने वेदो के ज्ञान के प्रकाश मे आर्य समाज की स्थापना की आर्य समाज कोई नया या अलग धर्म नही है यह हमारे धर्म के वास्तविक पुरातन स्वरूप को पुनः स्थापित करता है जिसके श्री राम, श्री कृष्ण व उनके पूर्वज भी अनुयायी थे । परमपिता परमेश्वर एक है उसके अनेको गुणों के कारण ही उनके अनेको नाम हैं ओ३म् ईश्वर का प्रमुख व निज नाम है ईश्वर ने ऋषियों के माध्यम से चारों वेदो का ज्ञान मनुष्यों को दिया उपनिषदों मे वेदों का संक्षिप्त ज्ञान है । गीता मे श्री कृष्ण द्वारा युद्ध भूमि मे दिये गये उपदेश है महर्षि वाल्मिकी कृत रामायण, श्री वेद व्यास कृत महाभारत व गोस्वामी तुलसी दास जी कृत रामचरित्र मानस हमारी संस्कृति की यशोगाथा को गाते है। वेद ही हमारे प्रमुख धर्म ग्रन्थ है। जिसमें स्वयं ईश्वर ने सृष्टी मे सबसे पहले ज्ञान दिया। आईये हम सब वेदो की आज्ञाओं का पालन करें वेदो के मार्ग का अनुशरण करें व अपने जीवन को वेद मय-यज्ञ मय बनायें!
आर्य समाज किरतपुर आपके स्वागत के लिए उत्सुक –
श्री ओमप्रकाश आर्य,
श्री शिवदत्त शर्मा
श्री केशव शरण जी,
श्री रोहिताश सिंह जी
श्री महेन्द्र सिंह जी,
श्री राधेश्याम जी,
श्री अशोक आर्य जी
संयोजक :-संजय आर्य
विजेन्द्र राणा
आलोक रस्तौगी
अध्यक्ष -विजय गोयल
मंत्री -प्रसून शर्मा
कोषाध्यक्ष – सुधीर गोयल
आप अपना अमूल्य सहयोग धन के रूप में आर्य समाज किरतपुर को देकर पुण्य के भागी बनें।

सम्पर्क सूत्र :-9837444469, 9412609044, 9457652618, 9219230354










