ओ३म् क्रतोस्मरः- अपने किये कर्मों का स्मरण कर
“वेद सब सत्य विद्या की पुस्तक है। वेद का पढ़ना – पढ़ाना, सुनना – सुनाना सब आर्यों का परम् धर्म है।
आर्य समाज जड़ौदा पाण्डा, सहारनपुर इक्किसवां वार्षिकोत्सव (21-22-23 अक्टूबर 2024)
आमन्त्रण
महर्षि दयानन्द सरस्वती धर्मप्रेमी सज्जनों एवं देवियों,
श्री………………………………….
आपको आमंत्रित करते हुए अत्यन्त हर्ष है कि यह आर्य समाज अपने धर्म, घुन की लगन से, मानव मूल्यों की पुनर्स्थापनार्य, वेद ज्ञान से आत्मज्ञान, परिवार, समाज, राष्ट्र के कल्याणार्थ, वैदिक संस्कृति, संस्कारों के लिए आपको सपरिवार, अपने इष्ट मित्रों सहित सादर आमंत्रित करते है। क्योंकि –
- “वेदोऽखिलो धर्म – मूल” वेद ही सभी धर्मों का मूल है।
- ऋग्वेद विश्व साहित्य की प्राचीनतम पुस्तक है।
- वेद ही मानव जीवन को ऊँचा कर सकता है यूरोप का समस्त दर्शन विज्ञान वेद के सामने तुच्छ है।
- जो वेद में कहा वही धर्म है और जो वेद विरूद्ध है वह अधर्म है।
- पक्षपात रहित आचरण ही धर्म है।
आमंत्रित विद्वान्
- प्रख्यात वेद विद्वान् स्वामी सच्चिदानन्द जी व आर्य कृष्ण शास्त्री ‘निवाडी’
प्रख्यात भजनों भजनोपदेशक श्री दिनेश पथिक जी
महर्षि मनु प्रो. मैक्समूलर प्रो. एमर्सन वेदव्यास ।
आयोजन का लक्ष्य ईश्वर-वेद-यज्ञ ऋषि दयानन्द-आर्यसमाज द्वारा वैदिक मान्यताओं का प्रचार।
कार्यक्रम
दि. 21/10/2024 सोमवार
प्रातः 8,00 से 11.00 बजे यज्ञ भजन-उपदेश।
सायं 3.00 से 5.00 बजे तक भजन, उपदेश
रात्रि 7.00 से 10.00- भजन, उपदेश, भजन।
दि. 22/10/2024 मंगलवार
प्रातः 8.00 से 11.00 बजे – ध्वजारोहण यज्ञ भजन-उपदेश।
सायं 3.00 से 5.00 बजे तक भजन, उपदेश
रात्रि 7.00 से 10.00 – भजन, उपदेश, भजन।
दि. 23/10/2024 बुधवार
प्रातः 8.00 से 11 बजे यज्ञ-भजन-उपदेश।
सायं 3.00 से 5.00 बजे तक भजन, उपदेश
रात्रि 7.00 से 10.00 भजन, उपदेश, भजन।
(समापन)
आयोजक
आर्य समाज जडौदा पाण्डा के समस्त सदस्यगण व गणमान्य सज्जन
सम्पर्क सूत्र – 9456642031, 9760248651, 7906957200
सुनील कुमार त्यागी कै. कोटा (राजस्थान)
महेन्द्र सिंह त्यागी दिल्ली
शुद्धि करलो, यज्ञ वेद के उपदेशों से, तन की, मन की,
संरक्षक सदस्य
नरेश त्यागी (मंत्री मो० 97602 48651
नवीन कुमार त्यागी महाप्रबन्धक शुगर नोएडा
रजनीश (सोनू) आमा) मी 7906937200
महेन्द्र प्रसाद त्यागी (सेवा निवृ० प्रधानाचार्य) इ०का० जड़ौदा पाण्डा
धन की, जीवन चमकेगा। होगा उद्धार, कर लो खाली पात्र, भर लो ओ३म् नाम के हीरे मोती, वेदामृत बरसेगा ।।
(आदित्य ऋषि)
नोट : बाहर से आने वाले सज्जनो के लिये भोजन एवं ठहरने की व्यवस्था कार्यक्रम स्थल पर ही है।










