आर्य नेता श्रद्धानंद शर्मा जी की पत्नी पंचतत्त्व में विलीन

0
65
Panchtatva mein vilin

गाजियाबाद, 27 फरवरी 2025 – आर्य समाज के प्रतिष्ठित संरक्षक श्रद्धानंद शर्मा की धर्मपत्नी श्रीमती अंगूरी देवी शर्मा का 87 वर्ष की आयु में आज प्रातः स्वर्गवास हो गया। उनके निधन से न केवल उनका परिवार, बल्कि समूचा आर्य समाज शोकाकुल है।

उनका अंतिम संस्कार हिण्डन नदी के मोक्ष स्थली शमशान घाट पर संपूर्ण वैदिक रीति-रिवाजों के साथ संपन्न हुआ। वैदिक विद्वान श्री कृष्णशास्त्री ने वेद मंत्रों के उच्चारण के साथ यह संस्कार संपन्न कराया। उनके सुपुत्र सतेन्द्र आत्रेय ने अपने भाइयों रविन्द्र आत्रेय और ज्ञानेंद्र आत्रेय के साथ उन्हें मुखाग्नि दी।

ईश्वरभक्ति और सेवा की प्रतिमूर्ति

श्रीमती अंगूरी देवी शर्मा अपने सरल और सौम्य स्वभाव के लिए जानी जाती थीं। वे धर्मपरायण, दानशील और ईश्वरभक्त थीं। उनके जीवन का उद्देश्य समाज और परिवार के प्रति समर्पण रहा। उनका निधन न केवल उनके परिवार के लिए, बल्कि संपूर्ण आर्य समाज के लिए अपूरणीय क्षति है।

इस दुःखद घड़ी में केन्द्रीय आर्य युवक परिषद्, उत्तर प्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष श्री प्रवीण आर्य ने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करते हुए कहा, “ईश्वर परिवार को इस असहनीय दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करें।”

अन्त्येष्टि संस्कार का वैदिक महत्व

इस अवसर पर आर्य समाज के वरिष्ठ नेता सेवा राम त्यागी ने वैदिक संस्कारों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि अन्त्येष्टि संस्कार मानव जीवन के 16 संस्कारों में अंतिम और महत्वपूर्ण संस्कार है। उन्होंने बताया कि आधुनिक समय में मृत शरीर पर अत्यधिक चादरें चढ़ाने की परंपरा बढ़ रही है, जबकि इसके बजाय यदि घी और हवन सामग्री से अग्नि दी जाए, तो यह अधिक पर्यावरण-संवर्धक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से उपयुक्त होगा।

उन्होंने आगे कहा, “मनुष्य का शरीर पंचभूतों (पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश) से बना होता है और वैदिक परंपरा के अनुसार इसे अग्नि में समर्पित करके पंचतत्त्वों में विलीन कर देना उचित है। यह प्रक्रिया पर्यावरण की शुद्धता बनाए रखने में भी सहायक होती है।”

Panchtatva  mein vilin
शोकसभा में आर्य समाज के वरिष्ठ जनों की उपस्थिति

इस अवसर पर अनेक गणमान्य आर्य प्रतिनिधि उपस्थित थे, जिन्होंने श्रद्धांजलि अर्पित की और दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। उपस्थित जनों में प्रमुख रूप से –

  • सत्यवीर चौधरी
  • मंगल सिंह चौधरी
  • तेजपाल सिंह
  • नरेन्द्र पांचाल
  • डॉ. वीरेन्द्र नाथ सरदाना
  • कौशल गुप्ता

इसके अतिरिक्त, सैकड़ों की संख्या में आर्य समाज के अनुयायी, परिवारजन और स्थानीय निवासी भी अंतिम संस्कार में सम्मिलित हुए। सभी ने श्रीमती अंगूरी देवी शर्मा के महान व्यक्तित्व और उनके समाज के प्रति योगदान को याद किया।

निष्कर्ष

श्रीमती अंगूरी देवी शर्मा का निधन एक युगांतकारी क्षति है। वे न केवल अपने परिवार के लिए, बल्कि समस्त आर्य समाज के लिए प्रेरणा स्रोत थीं। उनका जीवन सादगी, सेवा और संस्कारों की मिसाल था। उनके जीवन से हमें यह सीख मिलती है कि सेवा, समर्पण और आध्यात्मिकता से जीवन को सार्थक बनाया जा सकता है।

ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करें और उनके परिवार को इस कठिन समय में धैर्य और शक्ति दें।

ॐ शांति।

  • सूचनार्थ-
  • प्रवीण आर्य
  • मीडिया प्रभारी