अनमोल पाया चोला,विषयों में ना गंवाना।

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अनमोल पाया चोला, विषयों में ना गंवाना।

तर्ज – मौसम है आशकाना…..

अनमोल पाया चोला,
विषयों में ना गंवाना।
दिन चार का है जीवन,
जीने का है बहाना।।

लैलो-निहार ये भी,
मालिक की रचना सारी
कब तक “सचिन” लिखेगा,
इतना ही है ये गाना अनमोल पाया……

जितने भी जीव जग में,
बेहतर बनाया सबसे
मोह-माया से ना मोह कर,
क्यों बन गया दिवाना अनमोल पाया……

दुनियाँ में आये हैं हम,
जाना जरूर होगा आयेगा
जब बुलावा, दुनियाँ से होगा
जाना अनमोल पाया……

भक्ति के पथ पे चलना,
जीवन के इस सफर में चलना पड़ेगा
एक दिन, जाने कब होगा
आना अनमोल पाया……