अमृत ध्यान साधना शिविर – 2025
(24 से 30 नवम्बर 2025, ज्वालापुर – हरिद्वार)
स्थान: आर्य विरक्त वानप्रस्थ एवं संन्यास आश्रम, ज्वालापुर – हरिद्वार
आध्यात्मिक उन्नति में रुचि रखनेवाले जिज्ञासु-जन,
और पारिवारिक, सामाजिक जीवन को, सुखद बनाने की कामना रखने वाले गृहस्थी साधक महानुभाव, मातृशक्ति एवं ऋषियों की आध्यात्मिक उड़ान को अनुभव करने चाह रखने वाले भाई-बहन जरुर भाग लेवें।
शिविर में जहां आप मूलभूत आध्यात्मिक विषयों का सरल शब्दों में ज्ञान प्राप्त कर सकेंगे, वहीं उन सिद्धांतों को प्रायोगिक रूप से जीवन में जीना भी सीख सकेंगे।
शिविर में आप ऋषि-मुनियों की भारतीय आध्यात्मिक जीवनशैली सीख सकेंगे, जिससे आप अपने वर्तमान और भविष्य दोनों को सुखद बना सकेंगे।
यदि आप अपने में या अपनों में भी ऐसा आध्यात्मिक परिवर्तन लाना चाहते हैं, जिससे आपके साथ वे लोग और उनके साथ आप, बहुत आनन्द पूर्वक, आध्यात्मिक वैदिक जीवन बिताएं, तो फिर दोनों को, या सब को एकसाथ एक ही शिविर में भाग लेना चाहिए।
यदि आप नव दंपति हैं, और स्वयं को और आने वाली संतति को श्रेष्ठ बनाना चाहते हैं, तो इस शिविर में आपको अवश्य भाग लेना चाहिए,
यहां से आपको वो सिद्धांत और जीवन को व्यावहारिक तल पर सुख शांति पूर्वक जीने की बातें, समस्याओं को सुलझाने की युक्तियां, पारस्परिक सामंजस्य बनाएं रखने के मंत्रों का ज्ञान होगा,वैदिक जीवन पद्धति मिलेगी, जिसका आप अनुसरण करके व्यक्तिगत या परिवारिक जीवन को सुखद बनाते हुए-सुखपूर्वक जी सकेंगे।
संबंधित महत्वपूर्ण सूचना
बड़े हर्ष के साथ सूचित किया जाता है कि 24 से 30 नवम्बर 2025 तक आर्य विरक्त वानप्रस्थ संन्यास आश्रम, ज्वालापुर (हरिद्वार) में अमृत ध्यान साधना शिविर का आयोजन किया जा रहा है।
यह शिविर उन सभी जिज्ञासु-जनों, गृहस्थ साधकों, नवदंपतियों, मातृशक्ति एवं युवा-वृद्ध भाई-बहनों के लिए विशेष रूप से उपयोगी है,
जो आध्यात्मिक उन्नति, मानसिक शांति, सुखी पारिवारिक जीवन, तथा ऋषियों की वैदिक जीवनशैली का अनुभव करना चाहते हैं।
शिविर की मुख्य विशेषताएं
- शिविर में विषय प्रस्तुति अत्यंत सरल शब्दों में ,भाषाशैली में होगी, जिससे इस विषय के अनजान नये योगाभ्यासी साधक/साधिकाएं भी आसानी से विषय-वस्तु को समझ सीख सकेंगे। “#अषटाङ्गयोग पर #करियात्मक योगाभ्यास #परशिक्षण प्राप्त कर सकेंगे।
- अमृत ध्यान साधना शिविर में जो भी आपको बताया, सिकाया और ध्यान में बैठाकर कराया जाएगा वह सब विषय वस्तुएं वेदों, दर्शनों,उपनिषदों , गीता, सांख्य-योग, न्याय-वैशेषिक, वेदान्तादि दर्शन और अन्य आर्ष ग्रन्थों पर आधारित होगा। कई अनुभवी योगियों और अपने भी अनुभव प्राप्त होंगे।
- सम्पूर्ण शिविर – थ्योरी और प्रैक्टिकल पर आधारित है। शाब्दिक ज्ञान और क्रियात्मक प्रयोगों पर आधारित है। आप खाली मन आयेंगे और मन भरके आत्मा परमात्मा प्रकृति और उनसे जुड़े अनेकों विषयों पर ज्ञान और अनुभव प्राप्त करके जाएंगे।
- शिविर में अष्टाङ्गयोग ( यम नियम आसन प्राणायाम प्रत्याहार धारणा ध्यान और समाधि )का तात्विक चिंतन आप सुनेंगे ।
- यम-नियम के अभ्यास से कैसे योगी की सामाजिक और व्यक्तिगत आध्यात्मिक जीवन की उन्नति होती है यह रहस्य आप जानेंगे और अनुभव कर आनन्दित होंगे।
- सांख्य दर्शन के 25 तत्त्व अर्थात् प्रकृति से परमात्मा और जीवात्मा तक समस्त अखिल विश्व के घटकों के तत्त्वस्वरूप को जानेंगे, उनके ज्ञान से त्रिविध दुःख निवृत्ति के रहस्य को समझेंगे।
- योग दर्शन की क्रियात्मक योगाभ्यास की प्रयोगशाला में सांख्य के 25 तत्त्वों की ध्यानानुभूति करेंगे।
- न्याय और वैशेषिक से राग द्वेषादि विकारों से मुक्ति का प्रकार, 25 तत्त्वों के जानने की सही पद्धति और आत्मसाक्षात्कार की (आत्मा को शरीर) में खोजने की विधि सीखेंगें।
- वेदांत के सूत्रों से ब्रह्म के मर्म को, और गीता के श्लोकों से योगिराज श्रीकृष्ण के ज्ञानयोग भक्तियोग और कर्मयोग को। कर्म अकर्म और विकर्म तथा प्राणों को प्राणों में आत्मा और ब्रह्म में होमने की विधि सीखेंगे।
- महर्षि मनु प्रोक्त कर्मफल विज्ञान, किन कर्मों से किन योनियों में जीवात्मा बलात् जन्मता है पापों के प्रायश्चित की विधि और योग के द्वारा परमात्मा के साक्षात्कार की विद्या सीखेंगे ।
- मनुष्य को क्यों ईश्वर ने पैदा किया और उसके लिए संसार बनाया आदि रहस्यों को ईश्वरीय उपदेश- आदेश वेद मन्त्रों से आप जानेंगे।
- क्यों हम वेदों को सुन पढ़ कर भी विकारों से मुक्त नहीं होते इसके कारण को जान सकेंगे।
- यज्ञ क्या है? क्यों करें? यज्ञ की क्रिया को समझकर कैसे यजमान स्वर्ग को प्राप्त होता है। विधि हीन और दोष युक्त घृत सामग्री से यज्ञ करने वाले यजमान और कराने वाले पुरोहित नर्क में क्यों जाते हैं आदि रहस्य पूर्ण बातें जानेंगे।
- ध्यान प्रयोगों में दिव्य नाद, रस, स्पर्श, गंध और प्रकाश की दिव्य अनुभूतियां । अमृत यात्रा। योग निद्रा। अष्ट चक्र रहस्य । संस्कारों के साक्षात्कार से वर्तमान और पिछले जन्मों का ज्ञान। मन और आत्मा का अनुभव। स्त्री और पुरुष शरीर के पार चेतनानुभव । और भी बहुत कुछ सुनेंगे और ध्यान प्रयोगों में साक्षात अनुभव कर सकेंगें।
- ओ३म् नाम के जप की सही विधि जिस विधि से ईश्वर और आत्म साक्षात्कार एवं विकारों का अन्त होता है ।
- प्राणायाम की सही साधना विधि। जिससे शरीर में सत्त्वगुण की वृद्धि और मन पर नियंत्रण बढ़ता है।
- वेद प्रोक्त गायत्री मन्त्र के ज्ञान जप एवं ध्यान की तीन वर्षीय ईश्वर साक्षात्कार की वैदिक मंत्र साधना विधि को जान सकेंगे।
- आत्मनिरीक्षण, ईश्वरप्रणिधान, स्मरणशक्ति वृद्धि, मनोविकार निवृत्ति, मनोनियन्त्रण, विचारों पर नियंत्रण, अर्थशुचिता, भाव, भजन और विचार-शुद्धि आदि ध्यान का क्रियात्मक अभ्यास करना सीख सकेंगे ।
- ईश्वर का स्वरूप, उनकी कृपा, स्नेह और रक्षा को, सरल ध्यान द्वारा अनुभव और भक्ति-रस का पान कर सकेंगे ।
- तीनों शरीरों के बारे में, पंचकोशों के बारे में, दसों प्राणों के बारे में, कर्म की चार जातियों के बारे में और कर्म फलों के बारे में जान सकेंगे । वृतियों-विचारों को रोकना, बदलना, अप्रभावित रहना। मानसिक तनाव, अशान्ति, चंचलता, काम-क्रोध, मद लोभ लालच और अभिमान को दूर करना भी सीख सकेंगे हैं ।
- मन को जानना समझना, रोकना, विचारों को इच्छानुसार बदलना, मन को एकाग्र करना , शान्त प्रसन्न करना, आदि सीखने के लिएआप इस शिविर में भाग ले अवश्य लेवे।
इत्यादि प्रकार से यह “वैदिक अमृत ध्यान साधना शिविर” आपके लिए उत्प्रेरक, आध्यात्मिक जगत में प्रवेशक, सुखद जीवन जीने और आत्म उन्नति करने में उपयोगी सहयोगी बन सकता है। ऐसा हमें पूरा विश्वास है।
यह शिविर आपके जीवन में आध्यात्मिक उड़ान का प्रेरक बनेगा — यही विश्वास है।
कुछ आवश्यक निर्देश
शिविर में भाग लेने के लिए
- प्रथम आपका स्वस्थ होना अनिवार्य है अस्वस्थ होने पर कृपया रजिस्ट्रेशन न करावें ।
- अपने दैनिक उपयोग की वस्तुएँ साथ लावें।
- तेल-साबुन, नोट-बुक, पेन, टार्च, सादे वस्त्र, एक लोयी, मौसम की , शरीर की अनुकूलता के हिसाब से आवश्यक वस्तुएं अवश्य ही साथ लावें।
- शिविर-काल में मोबाईल-फोन रखना, इत्रादि सुगन्धित वस्तुएं लगाना, मादक-वस्तु का सेवन करना आदि निषेध है; और कीमती आभूषण आदि भी साथ में न लावें।
- वापसी के टिकट पहले से ही करा लेंवें, आने से पहले पंजीयन करावें, शिविर का समापन दि..30 नवंबर. को दोपहर भोजन पूर्व होगा।
- शिविर सहयोग शुल्क स्वेच्छिक है,पर अनिवार्य है।
- आवास-व्यवस्था महिलाएं और पुरुषों की अलग-अलग है। दम्पति या परिवार एक कुटिया में रह सकते है । भोजन व्यवस्था सामूहिक है।
- पेन और नोट-बुक साथ में अवश्य लावे, वस्त्र
- सादे और पहनावा सादगीपूर्ण हो, खांसी कफ दमा
- वायु विकार से ग्रसित साधक कृपया शिविर में भाग
- लेना अभी स्थगित करे।
- परिवार/दम्पति एक ही कुटिया में रह सकते हैं।
- शिविर स्थल पर . 24 नवम्बर को सायं ..4. बजे तक पहुंच जाये, ताकी आप रात्रि कक्षा में भाग ले सके।।
- शिविर में मादक द्रव्यों का सेवन करके आना पूर्णतः निषेध है । शिविर काल में मोबाइल फोन का प्रयोग निषेध है।
- शिविर में स्थान मात्र चालीस साधक साधिकाओं के लिए उपलब्ध हैं।
शुल्क विवरण
पंजीकरण शुल्क: ₹2100/- (रिफंडेबल नहीं)
शिविर पूर्ण करने पर वापसी: ₹1600/- (₹500 संस्थागत दान हेतु)
भोजन शुल्क: ₹100/दिन (नाश्ता, दोपहर, रात्रि भोजन सहित)
आवास शुल्क (प्रति रूम/प्रतिदिन):
- ₹1000 – एसी/सुविधायुक्त
- ₹500 – सामान्य सुविधायुक्त
- ₹300 – साधारण व्यवस्था
(एक रूम में 3 साधक)
सीटें केवल 40 साधकों के लिए उपलब्ध।
संपर्क
आचार्य सानन्द: 9414286575
नीलम बहिन: +91 9213819417
शोभा माता जी: +91 9560047451
✨ अभी पंजीकरण कराएँ और इस आध्यात्मिक अमृत-यात्रा का दिव्य अनुभव प्राप्त करें! ✨
अमृत ध्यान साधना शिविर 2025
स्थान: आर्य विरक्त वानप्रस्थ एवं संन्यास आश्रम, ज्वालापुर – हरिद्वार
दिनांक: 24 से 30 नवम्बर 2025 (7 दिवसीय)
जीवन में आध्यात्मिक गहराई, मानसिक शांति, आत्मचेतना और वैदिक जीवनशैली का अभ्यास करना चाहते हैं?
तो यह शिविर आपके लिए है…
और अधिक जानकारी के लिए नीचे दिए गए नम्बरों पर संपर्क करें:
[ आचार्य सानन्द मो. 9414286575 ]
[ नीलम बहिन मो.
+919213819417
[ शोभा माता जी मो.
+919560047451
अमृत ध्यान साधना शिविर 2025 – हरिद्वार में एक आध्यात्मिक यात्रा!
. क्या आप अपने जीवन में आध्यात्मिक गहराई, मानसिक शांति और आत्मचेतना का अनुभव करना चाहते हैं? ऋषि-मुनियों की प्राचीन वैदिक जीवनशैली को अपनाकर अपने वर्तमान और भविष्य को सुखद बनाने का यह स्वर्णिम अवसर है!
🗓️ दिनांक: 24 से 30 नवंबर 2025 (7 दिवसीय)
📍 स्थान: आर्य विरक्त वानप्रस्थ संन्यास आश्रम, ज्वालापुर, हरिद्वार
इस शिविर में आप सीखेंगे:
- अष्टाङ्गयोग का क्रियात्मक अभ्यास
- वेदों, उपनिषदों और गीता पर आधारित गहन ज्ञान
- सांख्य, न्याय, वैशेषिक और वेदांत के रहस्य
- दिव्य ध्यान प्रयोग (नाद, रस, स्पर्श, गंध, प्रकाश अनुभूतियां, योग निद्रा, अष्ट चक्र रहस्य)
- ओ३म् जप और प्राणायाम की सही विधि
- गायत्री मंत्र साधना और ईश्वर साक्षात्कार की विधि
- मनोनियंत्रण, स्मरणशक्ति वृद्धि और विकारों से मुक्ति
- यह शिविर उन सभी जिज्ञासु-जनों, गृहस्थ साधकों, नवदंपतियों और बच्चों के लिए है जो एक आनंदपूर्ण, आध्यात्मिक जीवन जीना चाहते हैं।
- सीमित सीटें: केवल 40 साधक/साधिकाओं के लिए!
- पंजीकरण शुल्क: ₹2100/- (₹1600/- शिविर पूर्ण होने पर वापसी)
- भोजन: ₹100/दिन
- आवास: ₹300/₹500/₹1000 प्रति
- • रूम/दिन (विकल्प उपलब्ध)
📞 अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें:
आचार्य सानन्द: 9414286575
नीलम बहिन: +919213819417
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