आये यहाँ, हैं घूमने,जायेंगे छोड़कर जहाँ
तर्ज – जाने कहाँ गये वो दिन……
आये यहाँ, हैं घूमने,
जायेंगे छोड़कर जहाँ,
न जाने फिर कब आयेंगे।
नाते ये रिश्ते, भूलकर,
जाने कहाँ लेंगे जन्म,
एक घर नया बसायेंगे।।।
बनकर के मेहमाँ आये हैं,
जग ये “सचिन” तेरा नहीं
जाने कहाँ किस मोड़ पर,
खा जायेगी कुज़ा कभी
आये यहाँ हैं………..
प्यारे से इस जहान में,
रह ना सकेंगे हम सदा आया है
जो वो जायेगा, राजा हो चाहे
कोई गदा आये यहाँ हैं……
ईश्वर के इस विधान को,
कोई ना तोड़ पायेगा
जितना लिखा नसीब में,
उतना ही अन्न जल खायेगा
आये यहाँ हैं……
इतना भी न समझ सके,
जीवन ये तेरा खेल है
माता-पिता भाई बहन,
ये कुछ दिनों का मेल है
आये यहाँ हैं…….










