आया है इस जगत् में तो, शुभ कर्म कमा ले।
आया है इस जगत् में तो
शुभ कर्म कमा ले।
गुण ईश के गा ले,
गुण ईश के गा ले।
दर-दर भटक रहा है क्यों ?
उठ ज्ञान-चक्षु खोल।
घट-घट निवासी को तू,
अपने घट में ही पा ले।।
मन शुद्ध बना ले,
शुभ कर्म कमा ले।।
क्या रंग रहा बावले,
कपड़ों को रंग में।
मन पहले अपना प्रेम के,
रंग में तू रंगा ले।।
हठ-दम्भ मिटा ले,
शुभ कर्म कमा ले।।
वह आँख ही क्या जो देख के,
दुखियों को तर न हो।
वह हाथ ही क्या,
जो नहीं गिरतों को उठा ले।
सीने से लगा ले,
शुभ कर्म कमा ले।।
भर लेते अपना पेट,
श्वान भी हैं जगत् में।
अच्छा तो यही खा ले,
और को भी खिला ले।।
आया है इस जगत् में,
तो शुभ कर्म कमा ले।










