आसमान पर उड़ने वाले

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आसमान पर उड़ने वाले

आसमान पर उड़ने वाले
धरती को पहचान-
किसी का रहा नहीं
अभिमान-2

अब भी समय है
शरण में आजा,
तज दे सब अभिमान।
ये संसार छोड़ ही जाना,
डेरा हो श्मशान……..।

ये संसार सभी नश्वर है,
फिर कैसा अभियान।
छोड़ के ये जग वो भी
चल दिए, जो थे वीर बलवान्……

धन-दौलत का मान बुरा है,
कहते वेद-पुराण।
अभिमानी रावण को देखो,
मिट गया नामोनिशान …..।

तीर्थ, मन्दिर-मन्दिर ढूंढ़ा,
गया न इतना ध्यान।
हर दिल में भगवान् बसा है,
हो सके तो पहचान……….।

सदा यहां रहना नहीं
तुझको, रहना है दिन चार।
इंसां से नफरत क्यों करता,
तू भी तो इन्सान……।