आपको यदि प्यार है

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आपको यदि प्यार है

आपको यदि प्यार है-
संसार के उपकार से,
तन मन की शुद्धि करलो
सात्विक आहार से।। टेक ।।

पाँच कसौटियों पै,
बड़ी और छोटियों पै,
भोजन को कसले
निश्चिन्त एकाग्रता से,
चबा करके तत्परता से,
रूचि करके रसले….
स्वच्छ साफ जगह पर हो
ऋतु अनुसार से ।।1।

आयुबल कान्ति बुद्धि,
जिससे हो वृद्धि शुद्धि,
भोजन वह भक्ष है अगर्हित
कर्म से उत्पन्न,
सात्विक उपलब्ध भोजन,
सादर समक्ष है परहित हो
निहित सुरक्षित,
जिसमें हर प्रकार से । ।2।।

आयु भोगों में बिघ्न,
किसी भी प्राणी के उत्पन्न,
जिससे न होता हो
भोजन वह करने लायक
मोक्ष मार्ग में सहायक,
धार्मिक समझौता हो
विश्व बन्धुत्व भाव बढ़ें
इस विचार से।।3।।

हर एक सुधारक कहे,
बिना भूख भोजन दहे।
यह न कभी भूलना सब्जी
और अन्न फल, दूध घृत वायु,
जल, जो हो अनुकूल ना
प्रेमी कर बचाव नाव
पार हो मझधार से
तन मन की शुद्धि करलो
सात्विक आहार से।।4।।