आज उल्झन में उल्झी है दुनिया

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आज उल्झन में उल्झी है दुनिया (धुन-बे वफा ये तेरा मुस्कराना)

आज उल्झन में उल्झी है दुनिया,
कोई सुलझाने वाला नहीं है।
पथ से भटकाने वाले अनेकों,
मार्ग दर्शाने वाला नहीं है।। टेक ।।

स्वर्ग में क्या-क्या साधन मिलेंगे,
यह बताने वाले तो अनेकों फिरें।
इस धरती पै कैसे रहें हम,
कोई बतलाने वाला नहीं है।।1।।

कोई हिन्दू बना कोई सिख बना।
कोई इसाई है, कोई मुसलमान है।
एक परिवार के सब सदस्य है,
कोई समझाने वाला नहीं है।।2।।

सारे मनुष्यों को ईश्वर की जो देन हैं,
उसमें किंचित भी तो असमानता नहीं।
कैसे भोगे हम सृष्टि प्रभु की,
कोई सिखलाने वाला नहीं है। ।3।।

भूगोल खगोल के ज्ञाता ज्ञाता बने।
जिसको जानना था,
उस को जाना नहीं,
भूल करते हैं भूलों पै प्रेमी।
कोई पछताने वाला नही है।।4।।