आध्यात्मिक प्रवचन, ध्यान एवं शंका समाधान कार्यक्रम का भव्य शुभारंभ:

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Aadhyatmik pravachan Dhyan AVN shanka Samadhan karykram ka Bhavya shubharambh 2025

आध्यात्मिक प्रवचन, ध्यान एवं शंका समाधान कार्यक्रम का भव्य शुभारंभ

प्रकृति, जीवात्मा एवं ईश्वर को जानकर व्यक्ति होगा सुखी – स्वामी विवेकानंद परिव्राजक

गाजियाबाद, 19 मार्च 2025 – आध्यात्मिक उन्नति और आत्मबोध के उद्देश्य से आर्य समाज समर्पण शोध संस्थान, राजेंद्र नगर, साहिबाबाद में समाजसेवी श्री जे.पी. शर्मा की अध्यक्षता में एक दिवसीय आध्यात्मिक प्रवचन, ध्यान एवं शंका समाधान कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर वैदिक ज्ञान, ईश्वर भक्ति और ध्यान साधना पर गहन चर्चा हुई।

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भजन-कीर्तन से भक्तिमय हुआ वातावरण

कार्यक्रम की शुरुआत भजनोपदेशक आचार्य ओमपाल शास्त्री और मास्टर विजेंद्र आर्य के सुमधुर भजनों से हुई। उनके द्वारा गाए गए ईश्वर भक्ति एवं ऋषि दयानंद के गुणगान से उपस्थित श्रद्धालु भाव-विभोर हो गए।

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स्वामी विवेकानंद परिव्राजक के ज्ञानवर्धक प्रवचन

इस कार्यक्रम के मुख्य वक्ता स्वामी विवेकानंद परिव्राजक (निर्देशक: दर्शन योग महाविद्यालय, रोजड़, गुजरात) ने अपने प्रवचन में संसार में सुखपूर्वक जीवन जीने के रहस्यों को उजागर किया। उन्होंने समझाया कि प्रकृति, जीवात्मा और ईश्वर तीनों अनादि सत्ता हैं, जिनका न तो कोई जन्म होता है और न ही कोई विनाश।

उन्होंने बताया कि –

  1. ईश्वर और जीवात्मा चेतन हैं, जबकि प्रकृति जड़ है।
  2. ईश्वर सर्वज्ञ हैं और जीवात्मा अल्पज्ञ।
  3. ईश्वर ने जीवात्मा के लिए संसार की रचना की, जिसमें सत्व, रज और तम – ये तीन गुण कार्य करते हैं।
  4. इन तीन गुणों से ही सुख-दुःख और अज्ञानता उत्पन्न होती है।

स्वामी जी ने श्रोताओं की जिज्ञासाओं का समाधान भी किया, जिनमें ईश्वर का अस्तित्व, पुनर्जन्म की सच्चाई और आत्मा का स्वरूप जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल थे।

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वैदिक ध्यान साधना का प्रयोगात्मक प्रशिक्षण

स्वामी जी ने वैदिक ध्यान की महिमा बताते हुए साधना का प्रयोगात्मक प्रशिक्षण भी दिया। उन्होंने साधकों को ज्ञान मुद्रा में बैठाकर “ओम् न्यायकारी, ओम् आनंद” का उच्चारण कराया और प्रार्थना करवाई –
“हे प्रभु, आप न्यायकारी हैं, हमें भी न्यायकारी बनाएं। हे प्रभु, आप आनंदस्वरूप हैं, हमें भी आनंद दें।”

उन्होंने बताया कि इस ध्यान साधना से –

  • बुद्धि का विकास होता है।
  • स्मरण शक्ति और एकाग्रता बढ़ती है।
  • मन, इंद्रियों और शरीर पर नियंत्रण स्थापित होता है।
  • बुरे संस्कारों का नाश और अच्छे संस्कारों का जागरण होता है।
  • ईश्वर के साक्षात्कार की अनुभूति प्राप्त होती है।
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विशिष्ट अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति

इस अवसर पर प्रमुख रूप से योगी प्रवीण आर्य, के.के. यादव, देवेन्द्र आर्य (आर्य बंधु), राम पाल चौहान, राज कुमार आर्य, जगदीश सैनी, सत्यवीर सैनी, राहुल आर्य, आशा आर्या, रमेश भटनागर, वेदप्रकाश देवव्रत कुंडू, विनोद गुप्ता, यज्ञवीर चौहान, टी.पी. अग्रवाल, प्रताप प्रजापति, सुमन मिश्रा, सुरेश सैनी, वेदवीर राठी, राकेश राणा, खेमचंद शास्त्री एवं श्रीमती कविता राठी आदि गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

सफल समापन एवं ऋषि लंगर

कार्यक्रम का संचालन जिला मंत्री सुरेश आर्य ने किया, जिन्होंने सभी अतिथियों का आभार प्रकट किया।
ऋषि लंगर की व्यवस्था ऋतम आर्य, यश आर्य और अभय यादव द्वारा की गई।
अंत में शांति पाठ और प्रसाद वितरण के साथ यह कार्यक्रम संपन्न हुआ।

साभार — प्रवीण आर्य

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