आचरण में धर्म को जो धारकर चले।

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आचरण में धर्म को जो धारकर चले।

आचरण में धर्म को
जो धारकर चले।
बस वही जीवन का
बेड़ा पार कर चले ।।

यतो अभ्युदय निः श्रेयस सिद्धि।
लोक परलोक आनन्द की वृद्धि ।।

जिससे प्राप्त हो वही
व्यवहार कर चले।
बस वही जीवन का
बेड़ा पार कर चले ।।1।।

निष्पक्ष न्याय प्रेम
सत्य आचरण ।
अभ्यास और वैराग्य
से शुद्धिकरण ।।
सिद्धान्त यह साकार
जो नर-नार कर चले।
बस वही जीवन का
बेड़ा पार कर चले।।2।।

औरों से जो चाहते हैं
अपने वही सुगम
दूसरों के लिये वास्ते। रास्ते ।।

तन मन वचन से
स्वीकार कर चले।
बस वही जीवन का
बेड़ा पार कर चले।।3।।

प्रेमी जीने का उत्तम तरीका।
इस दुनिया में है जिस किसी का।।

सार्थक पुरुषार्थ से संसार कर चले।
बस वही जीवन का बेड़ा पार कर चले।।4।।