थोड़ा सा वो भाग्यहीन है, जिसके घर सन्तान नहीं।
थोड़ा सा वो भाग्यहीन है,
जिसके घर सन्तान नहीं।
वो पूरा बदकिस्मत समझो,
याद जिसे भगवान् नहीं ।।
नालायक औलाद से बेहतर,
बिल्कुल वे बेऔलाद रहे।
महल से तो झोंपड़ी अच्छी है,
सुख से जो आबाद रहे।
दौलत वो किस काम की जिसमें,
जगदीश्वर न याद रहे।
काहे का वो धनी जो जिसमें,
निर्धन की तस्वीर नहीं।।
वो पूरा बदकिस्मत समझो, याद……
सूरत सीरत प्यार मुहब्बत,
एक की ये जागीर नहीं।
जिसकी इज्जत है जग में,
उससे बड़ा अमीर नहीं।
वो मन्दिर किस काम का जिसमें,
निर्धन की तस्वीर नहीं।
बेईमान कहलायेगा वो,
जिसका धर्म, ईमान नहीं।।
वो पूरा बदकिस्मत समझो, याद ………..
मानव को अपने पल पल को आत्मचिन्तन में लगाना चाहिए क्योंकि हर क्षण हम परमेश्वर द्वारा दिया गया समय खो रहे हैं।










