“यो तो हर आँख बहुत रोती है,मगर हर बूँद अश्क नहीं होती है”

0
282

यो तो हर आँख बहुत रोती है
मगर हर बूँद अश्क नहीं होती है
जो देख कर रोवे, जमाने का गम
उस आँख से, आँसू गिरे, जो मोती है

है स्वार्थ का धन, एक ऐसा धन
जो निर्धन से छिना होता है
और त्याग के हर एक आँसू में
सावन का महीना होता है

आलस्य में जिये या अमृत भी पिये
वो खून का पीना होता है
मेहनत का पसीना जहाँ गिरता
पत्थर भी नगीना होता है
कंकड़ भी नगीना होता है

भगवान् जैसा कोई नहीं
वो तो जहान् में सबसे बड़ा है

सब जग का आधार वही
दातार वही, करतार वही है
माता पिता बन्धु व सखा
सारे जग का आधार/करतार वही है
दुखियाँ निःसहायों का वही आसरा है
भगवान् जैसा कोई नहीं
वो तो जहान् में सबसे बड़ा है

इधर उधर को बचा के नजर
दुनिया में अगर कोई पाप करेगा
देख रहा कण कण में बसा
प्रभु/ईश्वर सबका (ही) इन्साफ करेगा
जिसे वो न जाने ऽऽऽऽऽ
जिसे वो न जाने ऐसा दुनिया में क्या है
भगवान् जैसा कोई नहीं
वो तो जहान् में सबसे बड़ा है

जब सब रिश्तेदार छोड़ कर प्यार
अगर मुख मोड़ चुके हों
तुझको/तुझ पर, संकट काल के बिगड़े हाल
समझ कर छोड़ चुके हों
कड़े वक्त में भीऽऽऽऽऽ
कड़े वक्त में भी साथी परमात्मा है
भगवान् जैसा कोई नहीं
वो तो जहान् में सबसे बड़ा है

भगवान् जैसा कोई नहीं
वो तो जहान् में सबसे बड़ा है