वैदिक आध्यात्मिक न्यास अगले 13वें स्नेह सम्मेलन, नर्मदापुरम, मध्यप्रदेश

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वैदिक आध्यात्मिक न्यास अगले 13वें स्नेह सम्मेलन

(स्थान – गुरुकुल, नर्मदापुरम, मध्यप्रदेश) 20-25 जनवरी 2025 के लिए निर्धारित विषय व नियम व्यवस्था-

१. आत्मा स्थान घेरता है या नहीं ? एक आत्मा में दूसरे आत्मा का प्रवेश सम्भव है या नहीं ? यदि समान स्थान पर समान समय में दो आत्माएं पहुंचें तो उनमें टक्कर होगी या नहीं ?

पक्ष- घेरता है। प्रवेश सम्भव नहीं। टक्कर होगी। १. मुनि सत्यजित्।
विपक्ष- नहीं घेरता। प्रवेश सम्भव है। १. स्वामी मुक्तानंद परिव्राजक।

दोनों पक्ष रखे जा चुके हैं, प्रश्नोत्तर हो चुके हैं। निर्णायकों का निर्णय आ चुका है। एक वक्ता के द्वारा निर्णय पर सहमति न होने से अब विद्वद्मण्डल अपना निर्णय सुनाएगा

२. ईश्वर के प्रति किये अपराध को वह क्षमा करता है या नहीं?

पक्ष – ईश्वर के प्रति किए अपराध क्षमा नहीं होते हैं
१. ब्र. तितिक्षा आर्या
२. ब्र. शिवनाथ आर्य

पक्ष – ईश्वर के प्रति किए अपराध क्षमा होते हैं
१. मुनि सत्यजित् जी

३. क्या रात्रि में अग्निहोत्र कर सकते हैं?

पक्ष – कर सकते हैं
१. ब्र. शिवनाथ आर्य
२. प्रो. शत्रुंजय रावत

पक्ष – नहीं कर सकते
अभी तक कोई वक्ता नहीं

४. पारायण यज्ञ करना उचित है या अनुचित?

पक्ष – पारायण यज्ञ उचित है
१. ब्र. तितिक्षा आर्या
२. आ. कर्मवीर जी

पक्ष – पारायण यज्ञ अनुचित है
१. ब्र. शिवनाथ आर्य
२. प्रो. शत्रुंजय रावत

( विषय संख्या 2, 3, 4 पर गत वर्ष चर्चा हो चुकी है किंतु अंतिम निर्णय लेने की दृष्टि से इस वर्ष पक्ष विपक्ष बनाकर निर्णायक चर्चा के लिए इन तीनों विषयों को पुनः रखा जा रहा है।

इन विषयों पर जो पहले वक्ता थे, वे भी अपना नाम वक्ता के रूप में दे सकते हैं और अन्य लोग भी वक्ता के रूप में अपना नाम दे सकते हैं। )

५. आत्मा स्वशरीर में विभु/व्यापक है या नहीं ?

पक्ष- है। १.आचार्य भद्रकाम वर्णी।..
विपक्ष- नहीं है। १. आचार्य रवीन्द्र।…..

अन्य वक्ता- विभु/व्यापक किसे कहते हैं ? १.आचार्य आनन्द प्रकाश।

६. असम्प्रज्ञात समाधि में ईश्वर अनुभूति के लिए मन की आवश्यकता है ?

/ असम्प्रज्ञात समाधि में ईश्वर अपना आनन्द आत्मा में मन के माध्यम से देता है या सीधे आत्मा में ?

पक्ष- आवश्यकता है। मन के माध्यम से देता है। १.आचार्य भद्रकाम वर्णी ।……
विपक्ष- आवश्यकता नहीं है। सीधे आत्मा में देता है। १. आचार्य रवीन्द्र।…..

७. मुक्ति में आत्मा की गति (अव्याहत ) स्वयं होती है या ईश्वर की सहायता से? स्वतंत्र या परतंत्र?

वक्ता: मुनि सत्यजित् जी

८. आकाश नित्य है या अनित्य? सावयव या निरवयव? इसमें सर्वतंत्र सिद्धांत क्या है?

वक्ता: मुनि सत्यजित् जी

९. मुक्ति के पूर्व सारा कर्माशय समाप्त हो जाता है या शेष रहता है ? मुक्ति के बाद शरीर प्राप्ति का आधार क्या है ? शेष कर्माशय या अन्य कोई ?

पक्ष- समाप्त हो जाता है। १. मुनि सत्यजित्।…….

विपक्ष- शेष रहता है। १.आचार्य रवीन्द्र। 2. आचार्य भद्रकाम जी। …….

१०. वर्णोच्चारण शिक्षा में उल्लिखित 63 वर्ण कौन से हैं ?

वक्ता – आ. रवीन्द्र जी

११. वैशेषिक दर्शन षट्पदार्थवादि है अथवा सप्तपदार्थवादि ? क्या वैशेषिक दर्शन में प्रतिपादित अभाव तथा अभाव प्रमाण एक ही है ? अभाव को प्रमाण के रूप में स्वीकार करना चाहिए ?

पक्ष – षट्पदार्थवादि एवं अभावनिरास

वक्ता – आ. आनन्दराज जी

१२. विषय :- क्या यज्ञ में उच्चारण शास्त्र विधान के अनुसार त्रैस्वर्य अथवा एकश्रुति में होना चाहिए ? क्या मनमाना उच्चारण विधिहीन है ?

पक्ष :- यज्ञ में उच्चारण शास्त्र विधान के अनुसार त्रैस्वर्य अथवा एकश्रुति में होना चाहिए । मनमाना उच्चारण विधिहीन है ।

१. आचार्य इन्द्र जी
२. प्रो. शत्रुंजय जी

विपक्ष :- यज्ञ में उच्चारण शास्त्र विधान के अनुसार त्रैस्वर्य अथवा एकश्रुति में नहीं होना चाहिए । मनमाना उच्चारण विधिहीन नहीं समझना चाहिए।

१. आचार्य अभय जी

प्रस्तावित नये विषय-

  1. क्या ईश्वर की “पारमार्थिक व व्यवहारिक ” दो प्रकार की सत्ता है ?
  2. स्थिर-निधि गुरुकुल/संस्था के लिए उचित या अनुचित ?
  3. विवक्षा व तात्पर्य का पारिभाषिक स्वरूप क्या है? इनमें क्या समानताएँ एवं भेद हैं? शाब्दबोध में विवक्षा व तात्पर्य का क्या योगदान है? क्या संस्कृत शास्त्रों में वर्णित विवक्षा व तात्पर्य के सिद्धान्त संस्कृत से भिन्न सब हिन्दी आदि भारतीय भाषाओं तथा विदेशी भाषाओं पर भी घटित हो सकते हैं?
  4. संगति का स्वरूप क्या है? संगति के अभाव में किसी विषय वस्तु की सम्यक् उपस्थापना में तथा उसके शाब्दबोध में बाधाएँ क्यों होती हैं?क्या संगति के सिद्धान्त भाषा निरपेक्ष होते हुए सब भाषाओं पर घटित होते हैं?
  5. किन कर्मों से पुरुष और किन कर्मों से स्त्री का जन्म मिलता है?
  6. बच्चे का दाह संस्कार होना चाहिए या गाड़ना चाहिए?

सामवेद उपासना का वेद है तथा यजुर्वेद कर्मकाण्ड का ।

भूर्भुवःस्वः इति व्याहृतियुक्त गायत्री मंत्र सामवेद में नहीं है, किंतु यजुर्वेद में है। सन्ध्योपासना में व्याहृतियुक्त गायत्री मंत्र का पाठ किया जाता है । प्रश्न है कि सन्ध्योपासना में सामवेद मंत्र का त्याग करके यजुर्वेदमंत्र का स्वीकार क्यों किया गया है ?

नियम व्यवस्था

१. प्रथम मुख्य वक्ता अपने विचार प्रस्तुत करेंगे, पुनः अन्यपक्ष व श्रोताओं के प्रश्नों के उत्तर देंगे। श्रोताओं के विचार प्रस्तुत होंगे, उन पर प्रश्नोत्तर भी हो सकते हैं। श्रोताओं के विचार के बाद भी मुख्य वक्ताओं को बोलने का अवसर दिया जाएगा।

२. इस प्रक्रिया से निर्णय का प्रयास होने पर भी यदि सर्वसम्मति नहीं बन पाती है तो उस सत्र के अध्यक्ष सहित अन्य निर्धारित विद्वद्मण्डल निर्णय देंगे। यदि आवश्यक हुआ तो पक्ष-विपक्ष पूर्वक वाद होगा, निर्णायक मंडल निर्णय देगा। उस पर भी प्रश्न उठें तो विषय सप्रमाण विद्वद्मण्डल के पास पुनर्विचार हेतु रखा जा सकता है।

३. चर्चा को सत्र की सीमा में नहीं बांधा जाएगा। निर्णय न होने की स्थिति में अगले सत्रों में उसे ही आगे चलाया जाएगा।

४. कोई भी सदस्य मुख्य वक्ता हो सकता है। उन्हें 31 दिसम्बर तक अपना नाम दे देना चाहिए। प्राप्त नामों के अधिक या कम होने पर चयन कार्यकारिणी द्वारा किया जाएगा।

५. चयनित मुख्य वक्ताओं को अपना लेख/सप्रमाण विषय प्रस्तुति 5 जनवरी तक सचिव को लिखित में दे देनी चाहिए। जिसे कार्यकारिणी द्वारा देख लेने पर दो दिन में सब के लिए समूह में प्रस्तुत कर दिया जाएगा।

६. यदि कोई मुख्यवक्ता अन्यों के लेख/प्रमाण देख कर अपने मत में परिवर्तन/संशोधन करना चाहे तो 10 जनवरी तक उसे सचिव को लिखित में सूचित कर देगा, जिसे सचिव समूह में प्रस्तुत कर देगा। इसके बाद संशोधित पक्ष-विपक्ष सत्र के लिए अंतिम किया जाएगा।

७. सत्रों के अध्यक्ष का निर्णय न्यास के अध्यक्ष व सचिव कर लेंगे। निर्णायकों व विद्वद्मण्डल का चयन न्यासियों से विचार पूर्वक किया जाएगा। मुख्यवक्ता न तो उस सत्र के अध्यक्ष होंगे, न निर्णायक, न विद्वद्मण्डल में।

यदि आप इसमें बोलना चाहें तो नाम व विषय लिख कर भेज देवें।

वक्ताओं में जिनके नाम हैं, यदि वे नाम हटाना चाहें तो, कृपया लिख कर भेज देवें।

*नाम वापस लेने की तथा अपना लेख देने की अंतिम तिथि 5 जनवरी। *

सम्मेलन को देखने सुनने व प्रश्न पूछने के लिए गूगल मीट पर विडियो कॉन्फ्रेन्सिंग व्यवस्था रहेगी। मुख्य वक्ता, विषय प्रस्तुति, अध्यक्षता, संचालक आदि को स्वयं उपस्थित होना अंनिवार्य है।

द्वितीय दिन *पौष कृष्ण सप्तमी, 21 जनवरी को स्वामी सत्यपति जी का स्मृति दिवस भी है। यह कार्यक्रम प्रातः 9.30 से 12.00 बजे के बीच होगा।

इसमें वानप्रस्थ साधक आश्रम, आर्यवन रोजड़ द्वारा डॉ नरेश जी धीमान को स्वामी सत्यपति सम्मान भी ₹११११११ के साथ प्रदान किया जाएगा।

रात्रि सत्र में भिन्न विषयों पर शंका – समाधान का विषय भी आवश्यकता अनुसार रहेगा।