कल्याण मार्ग का पथिक अमर हुतात्मा स्वामी श्रद्धानंद जी का संक्षिप्त परिचय

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कल्याण मार्ग का पथिक

अमर हुतात्मा स्वामी श्रद्धानंद जी संक्षिप्त परिचय

जन्म दिनांक 22 फरवरी 1856

पिता का नामः लाला नानकचंद जी

जन्म स्थान : ग्राम तलवान, जिला जालंधर (पंजाब)

शिक्षा : पंजाब यूनिवर्सिटी लॉ कॉलेज से वकालत की शिक्षा

व्यवसाय : सन्यास से पूर्व अधिवक्ता

बलिदान : 23 दिसंबर 1926 को धर्माध मुस्लिम अब्दुल रशीद द्वारा स्वामी जी की हत्या कर दी गई।

उल्लेखनीय योगदान

  • ‘स्वामी दयानंद सरस्वती जी से प्रभावित होकर आर्य समाज के आंदोलन को गति प्रदान की।
  • ‘उत्तर भारत में पहली बार पंजाब के जालंधर शहर में सन 1890 में स्त्री शिक्षा हेतु कन्या विद्यालय की स्थापना की।
  • वर्ष 1902 में भारतीय वैदिक शिक्षा के प्रचार हेतु हरिद्वार में ‘गुरुकुल कांगड़ी की स्थापना की। इसके अलावा गुरुकुल कुरुक्षेत्र, गुरुकुल इंद्रप्रस्थ दिल्ली सहित अनेक शैक्षणिक संस्थाओं की स्थापना भी की।
  • सन 1913 में जलियांवाला बाग हत्याकांड का विरोध किया एवं अमृतसर में कांग्रेस पार्टी का निर्भयतापूर्वक स्वागताध्यक्ष बनकर कांग्रेस का अधिवेशन करवाया।
  • दमनकारी रोलेट एक्ट के विरोध में सन् 1919 में दिल्ली के चांदनी चौक में बड़ा विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व किया और अंग्रेजों की संगीनों के आगे अपनी छाती खोलकर निर्भयतापूर्वक कहा कि ‘पहली गोली मेरे सीने पर चलाओ।’
  • 4 मार्च 1919 को दिल्ली की जामा मस्जिद के मिंबर (मुख्य मंच) से मुसलमानों की एक विशाल सभा को वेद मंत्र उच्चारण के साथ संबोधित किया
  • ‘हिंदी भाषा के प्रचार प्रसार हेतु ‘सद्धर्म प्रचारक’ आदि पत्रिकाएं और अनेक पुस्तकों को हिंदी भाषा में प्रकाशन करवाया।
  • ‘अछूत्तोद्धार के लिए सारे देश में अछूतों के साथ सहभोज कर उनके अधिकारों को दिलवाया। डॉ भीमराव अंबेडकर ने सन् 1922 में कहा था ‘स्वामी श्रद्धानंद अछूतों के महानतम और सबसे सच्चे हितैषी हैं।’
  • वर्ष 1923 में ‘भारतीय हिन्दू शुद्धि सभा’ का नेतृत्व किया। शुद्धि आंदोलन के द्वारा लगभग 1,63,000 मलखाना राजपूत, मूले जाट एवं रेगरिया समुदाय आदि को पुनः हिन्दू धर्म में लौटाया गया ।