पंजाब सरकार द्वारा समर्पित गुरु विरजानन्द यादगारी भवन
गुरु विरजानन्द जी की जन्मभूमि पर स्थित गुरुकुल करतारपुर विगत 50 वर्षों से निःशुल्क संस्कृत अध्ययन की परम्परा का निर्वहन कर रहा है। पिछले आठ वर्षों से न केवल गुरुकुल के छात्रों का निर्माण हो रहा है अपितु अन्य शिविरादि गतिविधियों के माध्यम से भी पंजाब में आर्यसमाज के कार्यों को बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। जिसके परिणामस्वरुप गुरुकुल का बजट बहुत अधिक हो गया है इसलिए आप सभी ऋषि भक्तों से निवेदन है, कि इस प्रचार कार्य को निरन्तर बनाये रखने हेतु आपको यथा सम्भव व्यक्तिगत अथवा सामाजिक संगठनों द्वारा आर्थिक सहयोग देना होगा, क्योंकि गुरुकुल का सम्पूर्ण व्यय दान पर ही आश्रित है।
वर्तमान में 250 छात्र इस निःशुल्क व्यवस्था का लाभ उठा रहे हैं।
गुरुकुल दान हेतु CSR फंड भी ले सकता है इस हेतु भी आप प्रयास कर सकते हैं। इस वर्ष ग्रीष्मावकाश में आवासीय शिविर का आयोजन निःशुल्क किया गया। अनुरोध- सभी आर्यों को सूचित करते हुए हमें हार्दिक प्रसन्नता हो रही है कि पंजाब सरकार द्वारा निर्माणाधीन गुरु विरजानन्द यादगारी भवन का कार्य सरकार ने पूर्ण करवा के हमें सौंप दिया है। अब इस भवन का रखरखाव एवं सदुपयोग की जिम्मेदारी हमारी ही है। गुरुकुल पूर्व से ही दान पर आश्रित है और वर्तमान में एक इस यादगारी भवन की भी अतिरिक्त जिम्मेवारी हमारे उपर आ गई है अतः ये पुनीत कार्य भी आप के आर्शीवाद से निरंतर गतिशील रहेगा।

निवेदनः
योजना- इस भवन में यज्ञ, योग, बृहद् वैदिक पुस्तकालय, ध्यान संस्कृत आदि का प्रशिक्षण केन्द्र, वैदिक अनुसंधान, संग्रहालय बनाने की योजना है। इस हेतु आप सभी के परामर्श भी आमंत्रित हैं।
उपप्रधान कुन्दनलाल अग्रवाल प्रचार मंत्री रणजीत आर्य
उपप्रधान कपूरचंद गर्ग कोषाध्यक्ष ओमप्रकाश अग्रवाल
उपप्रधान कैलाश गुप्ता सहकोषाध्यक्ष रोहित अग्रवाल
निवेदकः
उपप्रधाना सुशीला भगत
वेदप्रचार प्रमुख आदित्य प्रेमी
Guru Virjanand Smarak Smiti Trust PNB A/c 06462010029330, IFSC-PUNB0064610 SBI A/c 35334807618, IFSC SBIN0010751
महामंत्री – प्रो नरेश धीमान
संपर्क प्रमुख – अजय महाजन
उपप्रधान – डॉ सुधीर शर्मा
गुरुकुल मन्त्री – राकेश अग्रवाल
स्नातक प्रमुख – नरेन्द्र गांधी
मंत्री – प्रदीप कुमार
अधिष्ठाता – सुखदेव राज शास्त्री
कृपया ऑनलाईन दान हेतु इस क्यू आर (QR) कोड को अपने मोबाईल से स्कैन करें।

शिविर संबधी विशेष नियम
नोट- शिविर में मात्र 70 साधक/ साधिकाओं के लिए ही आवास की व्यवस्था है, अतः शीघ्र पंजीकरण करें। आवास, भोजन एवं प्रशिक्षण शुल्क स्वैच्छिक अनिवार्य है। अस्वस्थ व्यक्ति सर्दी जुखाम वाले शिविरों में आना स्थगित करें। शिविर स्थल पर 19 नवंबर को सायंकाल 5 बजे तक अवश्य पहुंचे। दैनिक उपयोग की वस्तुएँ साथ में लाएँ। वस्त्र ढीले और सादगी पूर्ण हों। कीमती आभूषण साथ में न लाएँ। कृप्या वापसी का टिकट पहले ही करा लें।
विस्तृत शिविर विषय वस्तु
- शिविर में सभी विषयों पर प्रस्तुति अत्यंत सरल शब्दों में होगी, जिससे इस विषय के अज्ञान नये योगाभ्यासी साधक/साधिकाएं भी आसानी से विषय-वस्तु को समझ, सीख एवं अष्टाङ्गयोग पर क्रियात्मक योगाभ्यास प्रशिक्षण प्राप्त कर सकेंगे।
- वेद, उपनिषद्, गीता, सांख्य, योग, न्याय, वैशेषिक, वेदान्तादि, दर्शन और अन्य आर्ष ग्रन्थों पर यह शिविर आधारित होगा। कई अनुभवी योगियों और अपने भी अनुभव प्राप्त होंगे।
- सम्पूर्ण शिविर – थ्योरी और प्रैक्टिकल पर आधारित है। शाब्दिक ज्ञान और क्रियात्मक प्रयोगों पर आधारित है। आप खाली मन आयेंगे और मन भर के आत्मा, परमात्मा, प्रकृति और उनसे जुड़े अनेकों विषयों पर ज्ञान और अनुभव प्राप्त करके जाएंगे।
- यम-नियम के पालन-अभ्यास करने से कैसे योगी साधक/साधिका की पारिवारिक, सामाजिक और व्यक्तिगत आध्यात्मिक उन्नति होती है, यह रहस्य आप जानेंगे और अनुभव कर आनन्दित होंगे।
- वेदांत के सूत्रों से ब्रह्म के मर्म को, और गीता के श्लोकों से योगिराज श्रीकृष्ण के ज्ञानयोग, भक्तियोग और कर्मयोग को कर्म, अकर्म और विकर्म तथा प्राणों को प्राणों में, आत्मा और ब्रहा में होना सीखेंगे।
- महर्षि मनु प्रोक्त कर्मफल विज्ञान, किन कर्मों से किन योनियों में जीवात्मा बलात् जन्मता है, पापों के प्रायश्चित की विधि और योग के द्वारा परमात्मा के साक्षात्कार की विद्या सीखेंगे।
- यज्ञ क्या है? क्यों करें? यज्ञ की क्रिया को समझकर कैसे यजमान स्वर्ग को प्राप्त होता है। विधि हीन और दोष युक्त घृत सामग्री से यज्ञ करने वाले यजमान और कराने वाले पुरोहित नर्क में क्यों जाते हैं आदि रहस्य पूर्ण बातें जानेंगे।
- ध्यान प्रयोगों में दिव्य नाद, रस, स्पर्श, गंध और प्रकाश की दिव्य अनुभूतियां, अमृत यात्रा, योग निद्रा, अष्ट चक्र रहस्य एवं संस्कारों के साक्षात्कार से वर्तमान और पिछले जन्मों का ज्ञान। मन और आत्मा का अनुभव। स्त्री और पुरुष शरीर के पार चेतनानुभव और भी बहुत कुछ सुनेंगे और ध्यान प्रयोगो में साक्षात अनुभव कर सकेंगें।
- ओउम् नाम के जप की सही विधि, जिस विधि से ईश्वर और आत्म साक्षात्कार एवं विकारों का अन्त होता है । प्राणायाम की सही साधना विधि आदि महत्वपूर्ण विषयों को समझाने का प्रयास होगा।
- ईश्वर का स्वरूप, उनकी कृपा, स्नेह और रक्षा को सरल ध्यान द्वारा अनुभव और भक्ति रस का पान कर सकेंगे ।
शिविर प्रशिक्षक
आचार्य सानन्द जी आर्ष ग्रन्थों के अध्येता हैं, आपका अध्ययन, परोपकारिणी सभा अजमेर, वानप्रस्थ साधक आश्रम, रोजड़ गुजरात में हुआ। आप स्वयं में एक योगी के साथ-साथ कर्मयोगी भी हैं। आपके द्वारा अमृत ध्यान साधना शिविर का आयोजन निरन्तर किया जा रहा है। आपकी ध्यान की विधि सरल व सहज हैं, जिसका लाभ सैकड़ों लोग ले चुके हैं। आपके द्वारा वेद, गीता, उपनिषद दर्शन आदि का पठन पाठन भी निरन्तर होता रहता है। आप एक अच्छे आर्य विद्वान के साथ-साथ योग साधक भी है। आपका अनेक वर्षों से गुरुकुल करतारपुर को सान्निध्य मिल रहा है। सम्पूर्ण शिविर आपके दिशा निर्देश व मार्गदर्शन में होगा।
॥ आचार्य सानन्द ॥
For more information and Registration 94142-86575, 98769-53271
Contact:-98030-43271, 98887-64311, 0181-2782252
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