झुमकों के शहर बरेली में गूंजे वेदमंत्र :
आर्य समाज विहारी पुर का 143वाँ ऋषिबोध सप्ताह कार्यक्रम हर्षोल्लास के साथ सम्पन्न
बरेली, 15 फरवरी 2025।
प्रसिद्ध “झुमकों के शहर” बरेली में एक बार फिर वैदिक धर्म की गूंज सुनाई दी। “बरेली के बाजार में झुमका गिरा रे” से पहचाने जाने वाले इस महानगर में आर्य समाज विहारी पुर का 143वाँ ऋषिबोध सप्ताह कार्यक्रम बड़े ही हर्षोल्लास और वैदिक उत्साह के साथ सम्पन्न हुआ।
पूरा शहर वेद की ऋचाओं से गुंजायमान रहा। बरेली बाजार में आर्यों द्वारा भव्य शोभायात्रा निकाली गई। यज्ञ-हवन और वेदमंत्रों की पवित्र ध्वनि से वातावरण आध्यात्मिक बन गया।
एक ओर वृषभ वाहन तो दूसरी ओर अश्व वाहन शोभायात्रा की विशेष आकर्षण रहे। ओ३म् पताकाएँ गगन को चूमती दिखाई दीं। “वैदिक धर्म की जय”, “महर्षि दयानंद की जय”, “भारत माता की जय”, “गौ माता की रक्षा हो”, “भगवान राम-योगेश्वर कृष्ण की जय” के नारों से व्योम मंडल आल्हादित हो उठा।
ऋग्वेद संहिता पाठ एवं यज्ञ आयोजन :
कार्यक्रम में ऋग्वेद संहिता पाठ का भव्य आयोजन किया गया। आर्य समाज विहारी पुर के लब्ध प्रतिष्ठित पुरोहित सपरिवार मुख्य यजमान रहे। प्रतिदिन वेद मंत्रों की व्याख्या एवं वैदिक भजनों के माध्यम से श्रोताओं ने आध्यात्मिक अमृत का पान किया।

कार्यक्रम के प्रमुख पुरोधा :
श्रीमान सुशील जी
आर्य समाज विहारी पुर के वर्तमान प्रधान एवं रसायन विज्ञान (Chemistry) के प्राध्यापक हैं। संपूर्ण कार्यक्रम का सफल नेतृत्व आपने किया।
याज्ञिक महिपाल जी
पं० महिपाल जी ने ऋग्वेद संहिता पाठ का कुशल संचालन किया। उनकी धर्मपत्नी का भी उल्लेखनीय सहयोग रहा।
आर्य वीर राहुल
पं० महिपाल जी के सुपुत्र राहुल जी अपने सहयोगी आदित्य जी के साथ बरेली जंक्शन पर विद्वानों के स्वागत हेतु तत्पर रहे और उन्हें ससम्मान आर्य समाज मंदिर तक लेकर आए।
डॉ. रामकुमार जी
आर्य समाज के युवा मंत्री के रूप में आपने कार्यक्रम का प्रभावी संचालन किया।
अखिलेश रायजादा जी
स्टेट बैंक से सेवानिवृत्त एवं वर्तमान कोषाध्यक्ष के रूप में आपका योगदान सराहनीय रहा। आपने अपने घर पर विद्वानों का आत्मीय सत्कार किया।
संदीप जी एवं श्रीमती ऊमा अग्रवाल
स्व० राजेंद्र अग्रवाल के सुपुत्र संदीप जी सपरिवार आर्य समाज सेवा में समर्पित हैं। श्रीमती ऊमा अग्रवाल ने विद्वानों का तन-मन-धन से स्वागत किया।
आचार्य चंद्रदेव
आर्य समाज भूड़ के पुरोहित के रूप में प्रतिदिन उपस्थित होकर प्रेरणा प्रदान की।
आचार्य रामदेव जी
ऋग्वेद संहिता पाठ के ब्रह्मा रहे। आप व्याकरण के प्रखर विद्वान एवं सौम्य व्यक्तित्व के धनी हैं।
इंजीनियर सचिन जी
आप राजीव दीक्षित के आजादी बचाओ आंदोलन से जुड़े प्रमुख सदस्यों में रहे। राजीव जी का प्रवास आपके निवास पर भी रहा।
वीजेंद्र गुप्ता जी
इंद्रदेव यती जी के शिष्य के रूप में प्रतिदिन यज्ञवेदी का श्रृंगार करते रहे।
भजनीक जीतेंद्र जी
आर्य भजनोपदेशक जनपद बरेली के रूप में आपके भजनों ने श्रोताओं को भाव-विभोर किया।
व्याख्यान वेदी के प्रमुख विषय :
कार्यक्रम में ईश्वर, अग्निहोत्र विज्ञान, माता-पिता-आचार्य त्रिदेव, आदर्श गृहस्थ जीवन, राष्ट्रपितामह महर्षि दयानंद सरस्वती के आदर्श एवं राष्ट्र रक्षा जैसे विषयों पर प्रभावी वेदोपदेश दिए गए।
पं० रुक्मिणी शास्त्री का भजनोपदेश :
बाराबंकी से पधारी पं० रुक्मिणी शास्त्री जी के भजनों ने श्रोताओं को कृतार्थ कर दिया। साथ ही स्थानीय विद्वान विजय पाल, हरदेव शास्त्री, श्रीमती अनीता गंगवार एवं श्रीमती देवकी जी के भजनोपदेश भी सराहे गए।

भीष्म प्रतिज्ञा – मंदिर जीर्णोद्धार की घोषणा :
आर्य समाज विहारीपुर के यशस्वी प्रधान आदरणीय सुशील अग्रवाल जी ने घोषणा की कि 143 वर्ष पुराना आर्य समाज मंदिर भवन शीघ्र ही जीर्णोद्धार हेतु पुनर्निर्मित किया जाएगा।
इस पुनीत कार्य हेतु आपने स्वयं, अपने परिवार व मित्रों की ओर से पाँच लाख रुपये की सार्वजनिक घोषणा की। आपने संकल्प लिया कि इस आर्य समाज को आर्यों का तीर्थ बनाया जाएगा। इस घोषणा पर उपस्थित आर्यों ने करतल ध्वनि से उनका अभिनंदन किया।
निष्कर्ष :
143वाँ ऋषिबोध सप्ताह कार्यक्रम न केवल वैदिक परंपराओं का पुनर्जागरण सिद्ध हुआ, बल्कि संगठन की एकता और सेवा भावना का भी सशक्त उदाहरण बना।
साभार – आचार्य सुरेश जोशी
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