हीरा जीवन है अनमोल
(तर्ज-तेरे पूजन को भगवान बना मन मन्दिर आलीशान)
हीरा जीवन है अनमोल इसे यों मिट्टी में न रोल।
अन्दर बाहर पूरा तोल इसे यों मिट्टी में न रोल।
१. यह दुनियाँ है एक सराये।
सदा कोई रहने न पाये।
इक दिन हो जाये बिस्तर गोल । इसे यों मिट्टी में न ……..
२. तू ने सब को देखा भाला।
क्या इस का परिणाम निकाला।
बन्दे ज्ञान की आँखें खोल । इसे यों मिट्टी में न रो……..
३. जो व्यवहार तुझे न भाया।
क्यों तू ने उस को अपनाया।
अपना अन्तःकरण टटोल । इसे यों मिट्टी में न रोल…….
४. कुछ न सोचा और विचारा।
यों ही वक्त गंवाया सारा।
अब तो खुल गई तेरी पोल। इसे यों मिट्टी में न रोल……..
५. जब तक मन में है चंचलता।
कैसे तुझ को मिले सफलता।
रहता मन क्यों डाँवाँ डोल। इसे यों मिट्टी में न रोल………
६. प्रभु को भज ले शाम सवेरे ।
इक दिन होंगे दूर अन्धेरे ।
मुख से ओम्’ पथिक’ नित बोल। इसे यों मिट्टी में न रोल……..










