संध्या से उपासना (Meditation) तक – आत्मिक यात्रा की एक सार्थक पहल
उपासना ही ध्यान (Meditation) का मूल, प्रामाणिक और सर्वाधिक प्राचीन स्वरूप है। यह साधक को आत्मा से परमात्मा के साक्षात्कार की दिशा में ले जाकर भय, मानसिक अशांति और जीवन की टॉक्सिसिटी से मुक्त करती है। उपासना के नियमित अभ्यास से मन, हृदय और संपूर्ण व्यक्तित्व में दिव्यता, स्थिरता और गहरी शांति का उदय होता है।
संध्या के माध्यम से इस प्राचीन ध्यान-विधा के सामूहिक अभ्यास को पुनर्जीवित करने तथा इसके व्यापक प्रसार के उद्देश्य से ‘सम्यक ध्यान संघ’ के रूप में संगठित होकर आगे बढ़ने पर चर्चा हेतु आर्य समाज, वाशी में आपको सादर आमंत्रित किया जाता है।
वेदों में निहित उपासना की दिव्य कला एवं विज्ञान को पुनरुद्धार हेतु विशेष सत्र
आयोजक: आर्य समाज, वाशी
वक्ता: रौनक माहेश्वरी
मोबाइल: 9004788265
स्थान: आर्य समाज, वाशी
तिथि: 30 नवम्बर 2025
समय: प्रातः 10:30 बजे
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