पावनकर्ता तेरी देदीप्यमान ज्योतियाँ

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प॒वित्रेण पुनीहि मा शुक्रेण॑ देव॒ दीद्यत्। अग्ने॒ क्रत्वा क्रतँ १२ ॥ यजु. १६/४०

तर्जः मणी कुट्टी कुरुम्बु डो रम्मी पूवाली

मेरे सच्चे प्रभुवर! सर्वहितकारी
तेरी ज्ञान ज्योति का हूँ मैं आभारी

तन्दन तन्दन ना तन्द नाना, तंद ना ना ना (2)॥ मेरे सच्चे

दिव्य है तू, दिव्यक्रतु
मेरा सच्चा नायक तू
करें पवित्र तेरे क्रतु
तेरे पवित्र वेद-ज्ञान से
होते पवित्र अनाचारी॥
मेरे सच्चे…

श्रद्धा भक्ति की अगन
मन में भरे उमंग
अनुपम, है शरण
आ गले मिल लें
हे क्रतून! कर कृपा
मिले तुझसे प्रज्ञा
जिससे करूँ उत्तम कर्म सदा
श्रेष्ठ कर्मों का मैं करके सम्पादन
सच्चा बनूँ मैं तेरा ही अनुयायी॥
मेरे सच्चे…

मेरे भगवन्! अनुदिन, करो जागृत मेरा मन
अगुवा तू बने, करूँ तेरा अनुसरण
कर्मों को बुद्धि पूर्वक मैं करके
योगी-तपस्वियों को मन में धर के
उनसे भी प्रेरणा लेके बन जाऊँ
तेरी तरंगिनी धारा का अनुरागी ॥
मेरे सच्चे…

(कतु) संकल्प। (अनाचारी) कुकर्मी। (अनुदिन) नित्य प्रति, प्रतिदिन। (सम्पादन) प्रस्तुत
करना ठीक करना। (अनुयायी) अनुकरण करने वाला। (अनुरागी) प्रेमी।