जन्म एवं पारिवारिक पृष्ठभूमि
चौ० माईधन जी का जन्म सोनीपत जिले के घड़वाल ग्राम के एक किसान परिवार में हुआ था। यह परिवार आर्य समाज के प्रति अत्यंत निष्ठावान और समर्पित रहा है। इसी परिवार में श्री पं० कपिलदेव शास्त्री जी का भी जन्म हुआ, जो आर्य समाज के उत्साही कार्यकर्ता और नेता थे।
आर्य समाज के प्रति योगदान
माईधन जी का जीवन सदैव आर्य समाज के कार्यों को समर्पित रहा। वह उपदेशकों को बुलाकर आर्य समाज का प्रचार कराते थे। उनके निवास स्थान पर उपदेशकों के लिए भोजन और ठहरने की व्यवस्था रहती थी। गुरुकुल भैसवाल के लिए चौ० माईधन तथा चौ० श्राशाराम दोनों ने १००–१०० रुपये का दान दिया। इसके अतिरिक्त भक्त फूलसिंह जी के एक लाख रुपये के व्रत को पूरा करने के लिए ग्राम की ओर से ५०० रुपये का योगदान भी उन्होंने किया।
सामाजिक सुधार कार्य
माईधन जी केवल आर्य समाज तक ही सीमित नहीं रहे, बल्कि समाज सुधार में भी अग्रणी रहे।उन्होंने अपने परिवार की एक विधवा का विरोध सहकर विधवा विवाह कराया, जो उस समय अत्यंत साहसिक और समाज सुधार का कदम था। वह स्वयं बहुत तगड़े, बलिष्ठ और कुश्ती के अच्छे पहलवान थे।
शहादत
सन 1990 (विक्रमी संवत) में मुसलमानों ने ग्राम में अनुचित ढंग से मस्जिद बनाने का प्रयास किया, जिसका ग्राम के आर्यों ने विरोध किया। इसी संघर्ष में शेख मुगला नामक कुख्यात गुंडे और उसके साथियों ने षड्यंत्र रचकर चौ० माईधन जी को निशाना बनाया। एक रात जब वे खेत में पानी देकर लौट रहे थे, तब ग्राम के बाहर जंगल में उन्हें गोली मार दी गई।उनकी आयु उस समय लगभग 36 वर्ष थी।
शेख मुगला का अत्याचार
शेख मुगला सांघी का कुख्यात गुंडा था। इसी ने भटगांव के जेलदार शेरसिंह की हत्या की थी। मोरी के सू० शिवलाल तथा खाण्डे के राजमल को भी उसने मारा। यहां तक कि चौ० छोटूराम को मारने की भी इसकी योजना थी।
निष्कर्ष
चौ० माईधन जी का जीवन त्याग, पराक्रम और आर्य समाज के प्रति निष्ठा का अद्वितीय उदाहरण है। उन्होंने समाज-सुधार और धर्मरक्षा के कार्यों में सक्रिय भाग लिया और अंततः अपने प्राणों की आहुति देकर शहीद हुए। उनकी शहादत आज भी आर्य वीरता का प्रेरणादायक प्रतीक है।










