श्रद्धा का रहस्य

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श्रृद्धयाग्नि समिध्यते श्रृद्धयया॑ हूतये हविः ।

श्रुद्धंया भर्गस्य मूर्धनि वच॒सा वेदयामसि

॥ ऋ.१०.१५१.१

तर्जः भक्तिंच्या फुलांचा डोलतो सुवाससुवा

श्रद्धा के फूलों से फैलती सुवास
पावन हृदय का जिसे मिले साथ
॥ श्रद्धा के॥

श्रद्धा के श्रेय में शांति का ध्येय (2)
सत्य की ये दृढ़ता तर्क से ही ज्ञेय
उच्च भव्य भावना अन्तः ज्ञात
॥ श्रद्धा के॥

श्रद्धा का अर्थ है सत्य का ही धारण (2)
प्रतिक्षेत्र जीवन का सत्य करे क्षालन
श्रद्धा की ये दृढ़भूमि, सत्य का निवास
॥ श्रद्धा के ॥

श्रद्धा विरहित कर्म में रहे विकल्प (2)
श्रद्धा युक्त कर्मों में बनते संकल्प
ऐ श्रद्धावान ! कर सत्य का प्रकाश
॥ श्रद्धा के ॥

(अन्तरज्ञात) हृदय से जाना हुआ। (क्षालन) शुद्धता, शुद्ध करने का कार्य। (विरहित)
रहित, शून्य बिना। (विकल्प) विरुद्ध कल्पना। (संकल्प) विचार दान-पुण्य या देव कर्म
करने का दृढ़ निश्चय करना।