अनमोल वाणी

0
9

मधुमन्मे निक्रमणं मधुमन्मे परायणम।

वाचा वदामि मधुमद्भयासं मधुसंदृशः ॥ अथ. १.३४.३

तर्जः बोल वीणी बोल

बोल वाणी बोल, बोल वाणी बोल
परिपूर्ण मीठे वचनों से अपनी वाचा तोल। ॥ बोल वाणी॥

स्नेहित हितकारिणी (2)
दोषरहित प्रभावती (2)
निश्चल सत्य भाषिणी
वागीश-वाचा खोल ॥
॥ बोल वाणी॥

चिन्तक मननशील अनुशीलित (2)
हार्दिक और होवे अनुनयी (2)
सत्यस्वरूप में खरी॥ (2)
बोले बोल अनमोल॥
॥बोल वाणी॥

आके निकट, मधुरस भर (2)
सबके रोग कष्ट तू हर (2)
बिछड़ के भी, भर प्रीति (2)
प्रेम की उठे कल्लोल॥
॥बोल वाणी ॥

जिन कार्यों में हो रत (2)
उनमें घोलना तू अमृत (2)
रहना तू मनस्विनी (2)
माँग प्रभु की ओल
॥बोल वाणी ॥

हो प्रवेश या निष्कृमण कभी (2)
सभा गृह समिति हो कहीं (2)
रखना वाचा अमी, (2)
अमी सरस रस घोल
॥बोल वाणी॥

(निष्कमण) घर से बाहर जाना। (वाचा) वाणी। (प्रभावती) बड़े प्रभावशाली। (निश्चल)
अटल, न टलने वाली। (वागीश) मृदु बोलने वाली। ज्ञानमयी। (ओल) गोद, शरण।
(चिन्तक) सोचने विचारने वाली। (अनुशीलित) बारम्बार चिन्तित । (अनुनयी) सभ्या विनीत
शांत। (कल्लोल) बड़ी लहर, आनन्द। (मनस्विनी) श्रेष्ठ चिन्तन वाली। (अमी) अमृत।