जन्म एवं पारिवारिक पृष्ठभूमि
श्री सोहनसिंह जी का जन्म हरियाणा के ग्राम कंसाला में एक साधारण किसान परिवार में हुआ था। आयु लगभग 60 वर्ष की अवस्था में भी आप समाज-सेवा व गोरक्षा जैसे कार्यों में सक्रिय रहे।
आर्य समाज से जुड़ाव
आर्य समाज से प्रभावित होकर आपने गोरक्षा आंदोलन में भाग लिया। आप म० बनीसिंह प्रधान आर्यसमाज आसन के नेतृत्व में सत्याग्रही जत्थे के साथ सम्मिलित हुए और मात्र 15 दिन की कैद की सजा पाई।
तिहाड़ जेल की घटना
जेलवास के दौरान (तिहाड़ जेल, कैम्प जेल) पौराणिक साधुओं द्वारा उत्पन्न झगड़े में आपको गंभीर चोटें आईं। संघर्ष के बीच आपको धक्का देकर जलती हुई भट्टी में डाल दिया गया, जिससे आपका एक पैर बुरी तरह जल गया। सत्याग्रही साथियों ने दूध-घृत आदि से आपकी सेवा की, किंतु आप कुछ भी पचा नहीं सके। स्थिति बिगड़ने पर आपको सरकारी (इरविन) अस्पताल भेजा गया, जहां अगले ही दिन आप शहीद हो गए।
अंतिम संस्कार
श्री सेठ खेमका, स्वामी ओ३मानन्द, म० बनीसिंह आर्य तथा म० देवीदास आर्य आदि ने आपके पार्थिव शरीर को यमुना तट स्थित निगम बोध घाट पर वैदिक रीति से अग्नि संस्कार किया।
झगड़े की पृष्ठभूमि
आपकी मृत्यु के बाद पुलिस ने पौराणिक साधुओं पर लाठीचार्ज किया और 6–7 साधुओं पर अभियोग चला। वे सात-आठ माह तक जेल में रहे। बाद में हरियाणा के आर्यसमाजियों की उदारता और दोनों पक्षों के नेताओं के आग्रह से समझौता हो गया।
बलिदान और विरासत
गो-रक्षा के लिए आपका यह बलिदान अमर हो गया। ग्राम कंसाला और हरियाणा का यश चार चाँद लगा। आर्य समाज के इतिहास में आप एक गौरवपूर्ण शहीद के रूप में आज भी स्मरण किए जाते हैं। आपकी स्मृति से आज भी समाज में त्याग और बलिदान की प्रेरणा मिलती है।










