श्रीकृष्ण जन्मोत्सव हर्षोल्लास से संपन्न
श्रीकृष्ण के सुदर्शनचक्र धारी स्वरूप को स्मरण कर स्वयं को उनके जैसा बनाने का व्रत लेना चाहिये-चन्द्रपाल शास्त्री
गाजियाबाद,शुक्रवार, 15 अगस्त 2025 को आर्य समाज कवि नगर गाजियाबाद में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव हर्षोल्लाह से संपन्न हुआ।आचार्य प्रमोद शास्त्री ने यज्ञ करवाया उसके पश्चात 79 वें स्वतंत्रता दिवस पर राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया।

सुप्रसिद्ध भजनोपदेश आचार्य नरेंद्र ने श्रीकृष्ण का गुणगान गीतों के माध्यम से किया जिसे सुनकर श्रोता भाव विभोर हो गए।
मुख्य वक्ता आचार्य चंद्रपाल शास्त्री ने कहा कि श्रीकृष्ण योगेश्वर थे, महात्मा थे,महावीर,धर्मात्मा व सुदर्शनचक्रधारी थे। वह वेदभक्त, ईश्वरभक्त, देशभक्त, ऋषियो व योगियों के अनुगामी थे। पूज्यों की पूजा व अपूज्यों की अवहेलना व उपेक्षा के साथ उनको दण्डित करते थे। अन्यायकारियों के लिए वह साक्षात काल थे। उन्होंने अपना सारा जीवन वेद धर्म का पालन करके व्यतीत किया। आज से लगभाग पांच हजार से कुछ अधिक वर्ष पूर्व उनका जन्म भारत की मथुरा नगरी में पिता वसुदेव व माता देवकी की कोख से हुआ था।

महाभारत युद्ध में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका थी। अनेक धर्म विरोधी व अन्यायकारियों का दमन कर-कराकर उन्होंने साधुओं व सज्जनों की रक्षा की। उनके बताये मार्ग पर न चलने से ही देश की वैदिक सनातन धर्मी जनता पर दुःख-दरिद्रता सहित पराधीनता व विधर्मियों द्वारा उनका व उनकी स्त्रियों का अपमान, शोषण व उन पर अन्याय किया गया। दुर्दिनों का यह सिलसिला चल ही रहा था कि महर्षि दयानन्द का आगमन हुआ। उन्होंने अतीत व स्वर्णिम इतिहास का स्मरण कराया व उन्हीं वैदिक सिद्धान्तों व मान्यताओं का प्रचार व प्रसार किया जो सृष्टि की आदि से आरम्भ परम्पराओं के अनुसार अभीष्ट थी। कृष्ण-जन्माष्टमी पर्व श्री कृष्ण जी का जन्मोत्सव है। इसको मनाते समय हमें उनके सुदर्शनचक्र धारी व वेदों में निष्ठावान स्वरूप को स्मरण कर स्वयं को उनके जैसा बनाने का व्रत लेना चाहिये।

आर्य समाज के प्रधान वी के धाम ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
आर्य केंद्रीय सभा के प्रधान सत्यवीर चौधरी ने विभिन्न आर्य समाजों के कार्यक्रमों की जानकारी दी और अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होने की अपील की।

शांति पाठ एवं ऋषि लंगर के साथ कार्यक्रम संपन्न हुआ।
साभार – प्रवीण आर्य
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