दिवस्पृशति भूमि च शब्दः पुण्येन कर्मणा।
यावत्स शब्दो भवति तावत् पुरुष उच्यते।।
जन्म और पृष्ठभूमि
श्रीयुत राधाकृष्ण जी राजस्थान के निवासी थे। आप श्रीयुत जीतमल जी के सुपुत्र थे। देश और धर्म के लिए आपके हृदय में अदम्य प्रेम और त्याग की भावना थी।
हैदराबाद सत्याग्रह में सहभागिता
हैदराबाद के सत्याग्रह संग्राम में, धर्मध्वजा को फहराने और वैदिक धर्म के संदेश का प्रचार करने के उद्देश्य से, आप सैनिक के रूप में शामिल हुए। आपका लक्ष्य स्पष्ट था — दयानन्द के कार्य को पूर्ण करना और धार्मिक स्वतंत्रता के लिए अग्रिम पंक्ति में खड़ा रहना।
बलिदान
निजामाबाद में २ अगस्त १९३९ को आपने अपना सर्वोच्च बलिदान दिया। आपका जीवन अल्पकालिक होते हुए भी उद्देश्यपूर्ण और त्यागमय रहा।
खेद
दुर्भाग्यवश, श्रीमती आर्य प्रतिनिधि सभा राजस्थान अथवा अन्य किसी सज्जन ने, प्रयास करने पर भी, आपका विस्तृत जीवन-वृत्तांत उपलब्ध नहीं कराया।
फिर भी, आपका बलिदान इतिहास के पन्नों पर अमिट रहेगा और वैदिक धर्म के लिए प्रेरणा स्रोत बना रहेगा।










