वह सब सुनता है देखता है

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नक्रीमिन्द्रो निकर्तवे न शुक्रः परिंशक्तवे। विश्वं शृणोति॒ि पश्य॑ति।। ऋ. ८.७५.५

तर्जः पदिये सन्ध्य राविल मारिल चायादे-राग देस

तुमने कभी कहा प्रभु से अपनी शरण दे?

और क्या कभी कहा के तू अपना अवन दे

स्वार्थ में जीने की जो राह बनाई है।

अपनी जीवन-सृष्टि आप सजाई है।

उसकी सत्ता से इनकार किया है।

उसके ही विरोध में प्रचार किया है।।… तुमने…

क्या तुम समझते हो के इन्द्र प्रभु का करें ना मान
लांछित करके इन्द्र प्रभु का करोगे नित अपमान
कह दो चाहे अद्भुत सृष्टि बन गई अपने आप
सागर की तरंगों में भी ना है किसका हाथ।
जगत बना प्रकृति से स्वयं,
आप की नष्ट हुआ स्वयं अतन्त्र
जिस दिन जीवन में आयेगा अत्यय,
याद आयेगा ईश्वर और उसका प्रभव
याद आयेगी उसकी दया, ओर उसका नित्य रक्षण
नास्तिक से आस्तिक बन जाएगा अभिमानी स्वयं
इन्द्र को तुम कर लोगे पराजित, है ये तुम्हारी भूल
तीर तुम्हारे तुम्हें ही चुनेंगे फाँकोगे तुम धूल
इसलिये नास्तिको जल्दी चेतो तुम,
ईश की सत्ता मानो बनो ना मासूम
ईश्वर का हृदय है बहुत ही नरम,
केवल तुम सम्भालो अपने क्रतु करम… तुमने…

चमत्कारी प्रभु की शक्ति देखो ओ इन्सान !
सब कुछ देखता सुनता है सब का प्रिय भगवान,
तुम चाहे छिप जाओ कहीं भी ईश्वर है दृष्टा
गुप्त स्थान पर कुछ भी बोलो लेकिन प्रभु सुनता
चाहे वाणी से बोलो मन में कुछ सोचो,
आश्रुतकर्ण है ईश्वर, न्यायकारी वो तो
उसकी दृष्टि शक्ति विश्व में सतत प्रबल
आओ उसके चरणों को बनायें आश्रय स्थल
सर्वश्रोता सर्वदृष्टा के ही प्रभु चरणों में
श्रद्धानवत प्रणाम करें विनीत हृदयों से
उसे अपमानित करने की ना करें कभी भी भूल
क्षमा याचना जो करता, कहते उसे ना कभी मूढ़
भाव विभोर हो अंक में लेता और कल्याण की वर्षा करता
क्यों ना प्रभु की गोद में बैठें, धन्य हों प्रभु से आनन्द लेके॥ तुमने…