हरियाली की घोड़ी पर सवार

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सोम उष्वाणाःसोतृभिर धिष्णु भिरवीनाम्

अवश्येन् हरिता याति धारया मन्द्रया याति धारिया सा.

डोलोमेरे जियरा, (2)

गाओ गीतों से, प्रभु की महिमा डोलो मेरे….

डोलो, मेरे जियरा (2)
परम गवैए, तेरे मुख के (2) दो शब्दों में बहार ॥

वाह प्रीतम डोलो मेरे…

डोलो मेरे जियरा (2)
मेरी लय में, लय प्रीतम की (2)
सुनता हूँ कई बार ॥ वाह प्रीतम डोलो मेरे…

डोलो मेरे जियरा (2)
सूखे होठों, पे आई तरावट (2)
तुझसे स्नेहागार ॥ वाह प्रीतम डोलो मेरे…

डोलो मेरे जियरा (2)
चेतना-भावना के ऊँचे शिखर पर (2)

यजमानों के साथ ॥ वाह प्रीतम डोलो मेरे…

डोलो मेरे जियरा (2)
प्रेम की हरी भरी, धार वहाई(2)
झूला तू हरवार ॥ वाह प्रीतम डोलो मेरे…

डोलो मेरे जियरा (2)
झूमती झामती धार मस्तानी (2)
इक नहीं धार हज़ार ॥ वाह प्रीतम डोलो मेरे…

डोलो मेरे जियरा (2)
बहते जीवन की, हरी भरी घोड़ी (2)

बाँकुरा उसपे सवार ॥ वाह प्रीतम डोलो मेरे…

जियरा जीव, आत्मा,स्नेहगार=स्नेह का भंडार, यजमान यज्ञ में भाग लेने वाला, बाँकुरा चतुर,