ऋषिवर हृदयस्पर्शी हो तुम, दिल से तुझे ना जुदा करें
जो सुझाया वेदों का ज्ञान पथ, निशदिन उसी पे चला करें ॥
ऋषिवर हृदयस्पर्शी…
न तजा कभी सत्य मार्ग को, ठुकरा दिया निज स्वार्थ को (2)
परमार्थ का जो दिखाया पथ, चलो हम भी सबका भला करें ॥
ऋषिवर हृदयस्पर्शी…
जो पराए आँसू थे खुद पिए, चले काँटो पे हँस के जिए (2)
संयम हो धैर्य हो शांत चित्त, मृदु-भाव दिल में बहा करें ॥
ऋषिवर हृदयस्पर्शी…
तेरे तर्कों से श्रद्धा जगी, अन्धश्रद्धा सर पग धर भगी (2)
जो दिखाया सत्य का अमर पथ, बन आर्य उसी पे चला करें ॥
ऋषिवर हृदयस्पर्शी…
ऋषि मृत्यु से बेफिक्र थे, ईश्वर अमृत पुत्र थे (2)
मृत्यु में जीवन की कला, ऋषिवर से हम सीखा करें ॥
ऋषिवर हृदयस्पर्शी…
जो कमा के दे दी सम्पदा, वो बढ़ेगी कब कैसे भला (2)
ऋषि ऋण को जो ना चुका सके, कहो आर्यों किससे गिला करें ॥
ऋषिवर हृदयस्पर्शी…










