आर्य क्यों सोया पड़ा खुद जाग तू जग को जगा

0
5

आर्य क्यों सोया पड़ा खुद जाग तू जग को जगा

तर्ज : सांग तू माझाच ना

आर्य क्यों सोया पड़ा खुद जाग तू जग को जगा

अपने संकल्पों से ऋषि दयानन्द के ऋण को चुका ॥ आर्य…

तुम तनिक सोचो असत्य से महर्षि कैसे लड़ा

कष्ट ने किए आक्रमण पर कष्ट को झुकना पड़ा

दे गए मधवन् ऋषिवर वेद ज्ञान की सम्पदा ॥ आर्य…

जागृति का सूर्य बनकर छा गया संसार पर,

वेद ज्ञान को कर उजागर चल दिया उपकार पर,

ऋषि के सत्यार्थ प्रकाश से सत्य की जागी प्रभा ॥ आर्य…

धर्म की खातिर वो जान से जान के अन्जान था ध्यान था

गुरु वचन का जिसमें निहित सन्मान था

आर्य शिष्य ऋषि के तुम दायित्व तुम पर है बड़ा ॥ आर्य…

लोग जागें, इससे पहले, तू ‘ललित’ खुद को जगा

कदम लाख चले ऋषि तू इक कदम चलके दिखा

प्राण बाती बुझे तो क्या, कुछ वेद दीप जला के जा ॥ आर्य…