शहीद श्री माधवराव सदाशिवराव जी

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परिचय

श्री माधवराव सदाशिवराव जी हैदराबाद राज्य के उस्मानाबाद जनपद के लातूर नगर के निवासी थे। केवल 30 वर्ष की आयु में उन्होंने निजामशाही के अत्याचारों के विरुद्ध सत्याग्रह करते हुए धर्म की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दी।


गुलबर्गा जेल की यातनाएं

वह गुलबर्गा जेल में कैद थे, जहाँ उन्हें अन्य सत्याग्रहियों के साथ अमानवीय श्रम में झोंका गया।
26 मई 1939 को भीषण गर्मी में नंगे पाँव काम करने के कारण उन्हें लू लग गई। इसके बावजूद जेल प्रशासन ने किसी भी प्रकार की चिकित्सा सुविधा प्रदान नहीं की।


बलिदान का क्षण

27 मई को प्रातःकाल वे अचेत हो गए। प्रशासन की उदासीनता के कारण पौने 12 बजे तक उन्हें अस्पताल नहीं पहुँचाया गया। अंततः प्रातः 5:50 बजे उन्होंने अपने प्राण त्याग दिए और दिवंगत सत्याग्रही साथियों से जा मिले।


जनता का शोक और प्रशासन की क्रूरता

उनकी मृत्यु की सूचना नगर में विद्युत गति से फैल गई। सहस्रों नर-नारी सिविल अस्पताल पहुँचे, परंतु पुलिस ने शव तक नहीं दिया। शव का फोटो लेने की अनुमति भी नहीं दी गई।
कुछ सत्याग्रहियों की उपस्थिति में प्रशासन ने ही उनका गुप्त दाह संस्कार कर दिया।


जाँच का प्रयास

सत्याग्रह समिति ने मृत्यु के कारणों की जाँच हेतु एक प्रतिनिधि भेजा, किंतु उसे कोई ठोस जानकारी प्राप्त नहीं हो सकी। निजामशाही के अत्याचार इस हद तक बढ़ चुके थे कि सत्य तक पहुँचना भी कठिन हो गया।


श्री माधवराव जी का यह बलिदान आर्य समाज के इतिहास में एक अमिट अध्याय बन गया। उनका जीवन आने वाली पीढ़ियों को सत्य, साहस और त्याग का संदेश देता रहेगा।