कर्मों की है ये माया

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कर्मों की है ये माया

कर्मों की है ये मायाऽऽऽऽ
कर्मों के खेल सारे ऽऽऽऽ
कर्मों के इस जहाँ में
क्या-क्या अजब नज़ारे
क्या-क्या अजब नज़ारे
क्या-क्या अजब नज़ारे
कर्मों की है ये मायाऽऽऽऽ

कर्मों से ही बने है
तकदीर आदमी की
कर्मों से ही बने है
इंसा जहाँ में आताऽऽऽऽ
इंसा जहाँ में आता
कर्मों के ही सहारे
कर्मों के ही सहारे
कर्मों के ही सहारे
कर्मों के ही सहारे
कर्मों की है ये मायाऽऽऽऽ

कोई राजा कोई भिक्षुक
सब कर्म के तमाशे
कोई राजा कोई भिक्षुक
महलों में रहता कोई
महलों में रहता कोई
कोई फिरते मारे-मारे
कोई फिरते मारे-मारे
कोई फिरते मारे-मारे
कोई फिरते मारे-मारे
कर्मों की है ये मायाऽऽऽऽ

कोई सन्त कोई डाकू
कोई छीने कोई बाटे
कोई सन्त कोई डाकू
कोई जीते सारी दुनियाऽऽऽऽ
कोई जीते सारी दुनिया
और कोई सबसे हारे
और कोई सबसे हारे
और कोई सबसे हारे
और कोई सबसे हारे
कर्मों की है ये मायाऽऽऽऽ

मजदूर देखो भूखा
कोई दिन करे ही खाये
मजदूर देखो भूखा
कोई रोशनी को तरसेऽऽऽऽ
कोई रोशनी को तरसे
कोई लूटता नजारे
कोई लूटता नजारे
कोई लूटता नजारे
कोई लूटता नजारे
कर्मों की है ये मायाऽऽऽऽ

सब कर्म की है माया
अब तक कोई न जाना
सब कर्म की है माया
तुम कर्म ऐसे करनाऽऽऽऽ
तुम कर्म ऐसे करना
देवें सभी दुवायें
देवें सभी दुवायें
देवें सभी दुवायें
देवें सभी दुवायें
कर्मों की है ये मायाऽऽऽऽ

स्वर :- श्री कुमार विशु भटनागर जी