प्राणों समान प्यारा
प्राणों समान प्यारा
कुल हो सदा हमारा
मानव समाज सारा
प्यारा बने हमारा
बन्धन कटानहारा
कुल हो सदा हमारा
प्राणों समान प्यारा
कुल हो सदा हमारा
हम सब सपूत तेरे
तू है सदा अधारा
सम्पर्क प्रेम होवे
कलह आदि का मिटारा
प्राणों समान प्यारा
कुल हो सदा हमारा
जग रङ्ग मञ्च यह है
नित खेल का लखारा
रवि चन्द्र ज्योत भावे
गुणगान सब तिहारा
प्राणों समान प्यारा
कुल हो सदा हमारा
रचनाकार :- प्राध्यापक भस्करानन्द जी
स्वर :- पण्डित रमेश जी चन्द्रपाल व श्रीमती जेन्नी जी चन्द्रपाल, आर्य समाज टोरोंटो, वैदिक कल्चर सेंटर










