जगाने आर्य जाति को
जगाने आर्य जाति को
जगाने आर्य जाति को
मेरे ऋषिराज आये थे
जगाने आर्य जाति को
मेरे ऋषिराज आये थे
सुनाने वेद की वाणी
मेरे ऋषिराज आये थे
मेरे ऋषिराज आये थे
जगाने आर्य जाति को
मेरे ऋषिराज आये थे
जगाने आर्य जाति को
मेरे ऋषिराज आये थे
अविद्या के अँधेरे में
यहाँ डूबी थी जब दुनिया
अविद्या के अँधेरे में
यहाँ डूबी थी जब दुनिया
यहाँ डूबी थी जब दुनिया
जलाने ज्ञान की ज्योति
जलाने ज्ञान की ज्योति
मेरे ऋषिराज आये थे
बड़े पाखंड पापों का
यहाँ पर बोलबाला था
बड़े पाखंड पापों का
यहाँ पर बोलबाला था
यहाँ पर बोलबाला था
मिटाने पाप की लंका
मिटाने पाप की लंका
मेरे ऋषिराज आये थे
जगाने आर्य जाति को
मेरे ऋषिराज आये थे
जगाने आर्य जाति को
मेरे ऋषिराज आये थे
दया के सिन्धु उस ऋषि को
पिलाया विष उन्होंने ही
दया के सिन्धु उस ऋषि को
पिलाया विष उन्होंने ही
पिलाया विष उन्होंने ही
पिलाने को जिन्हें अमृत
पिलाने को जिन्हें अमृत
मेरे ऋषिराज आये थे
उठो आर्यों बजा दो फिर
वही तुम वेद का डंका
उठो आर्यों बजा दो फिर
वही तुम वेद का डंका
वही तुम वेद का डंका
बजाने को जिसे जग में
बजाने को जिसे जग में
मेरे ऋषिराज आये थे
जगाने आर्य जाति को
मेरे ऋषिराज आये थे
जगा लो प्रेम की ज्योति
मेरे ऋषिराज आये थे
जगाने आर्य जाति को
मेरे ऋषिराज आये थे










