तू ही मात तू पिता रक्षक सुखदाता

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तू ही मात तू पिता रक्षक सुखदाता

तर्ज: विसरशील खास मला दृष्टि आड होता

तू ही मात तू पिता रक्षक सुखदाता
मन लगा दे तेरी ओर है यही अभिलाषा ॥ मन लगा दे…

संसारी हैं मात-पिता कब तलक ये नाता

मित्र बन्धु बान्धव का साथ छूट जाता
हर जनम में हर किसी का साथ तू निभाता ॥ तू ही मात…

तेरे हर सम्बन्ध तेरा भक्त जान पाता

सारे नाते स्थापित कर और क्या रह जाता
भक्त को तेरी ही आस तेरा संग सुहाता ॥ तू ही मात…

ऐसा गुण किसी में नहीं जैसा तुझमें दाता

प्राणियों को उन्नति के साधन तू दिलाता
पाप नाशक दिव्य तेज मस्तिष्क में दिखाता ॥ तू ही मात…

परमात्मग्नि का जीवनदायी तेज भाता
ईश्वर का अग्निरूप शुद्ध करे आत्मा
ढूँढ़ता कहाँ, प्रभु का आत्मा से नाता ॥ तू ही मात…