दाता कर्म फल देते, कर्म अनुसार

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दाता कर्म फल देते, कर्म अनुसार

तर्ज: जो तो आप पर येथे कुणीना आधार…

दाता कर्म फल देते, कर्म अनुसार
पाप करें दुर्गति पुण्य सुखकर
पाप करें दुर्गति पुण्य सदा सुखकर ॥ दाता कर्म…

देह की अन्धेरी कुटिया, इन्द्रियाँ बनी हैं दास
करे आत्मा जो संयत, इन्द्रियाँ करे ना पाप
कर्म इन्द्रियों का संयम, सिद्धि का आधार ॥ पाप करे…

देह जल से होवे शुद्ध मन हो सत्य से समृद्ध
सदा विद्या और तप से, होवे आत्मा प्रबुद्ध
ज्ञान से सदा ही बुद्धि होती शुद्धसार ॥ पाप करे…

सारथि के अश्व नियम में, इन्द्रियाँ भी आत्म संयम में
जब तलक ना ज्ञान संयम का अनुष्ठान असम्भव सा

विषयों की आसक्ति ही, आत्मा का विकार ॥ पाप करे…

पूर्वकृत कर्मों से अर्जित, भोग के साधन जीवन के
सुकर्मी को देता ईश्वर सुख सारे गिन गिन के
वासना विषय का फिर क्यूँ करे मन विचार ॥ पाप करे…

प्रकृति से जितना हो संग, ज्ञान का प्रकाश हो मंद
पाए जो प्रभु का संग पाप ना रहे ना दम्भ
कर्म फल विधान प्रभु का कर्म जीवनसार ॥ पाप करे…

(पूर्वकृत) पहले किए हुए (संयत) व्यवस्थित (संयम) मन वश में रखना (समृद्ध) उन्नत, प्रबुद्ध
(दम्भ) अकड, अहंकार (सिद्धि) प्राप्ति (अनुष्ठान) नियमपूर्वक कार्य करना (विधान) व्यवस्था