लगाऊँ क्या तेरा अनुमान ?

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लगाऊँ क्या तेरा अनुमान ?

ओ३म् न घा॑ त्व॒द्रिगप॑ वेति मे॒
मन॒स्त्वे इत्कामं॑ पुरुहूत शिश्रय ।
राजे॑व दस्म॒ नि ष॒दोऽधि॑ ब॒र्हिष्य॒स्मिन्त्सु सोमे॑ऽव॒पान॑मस्तु ते ॥

ऋग्वेद 10/43/2

अथर्ववेद 20/17/2

लगाऊँ क्या तेरा अनुमान ?
न तुझसा कोई प्रतिभावान
हुआ मोहित तव देख स्वरूप
कोई क्या करे तेरा उपमान
लगाऊँ क्या तेरा अनुमान ?

किया संसार में बहुत विहार
न मानी इच्छाओं ने हार
कभी सुख चैन मिला ना इस जीवन में
सतत हुआ अवमान
लगाऊँ क्या तेरा अनुमान ?
न तुझसा कोई प्रतिभावान

मनोरथ कामना और विचार
तेरे आश्रित है सर्वाधार
करो शुद्धता हृदय के अन्तरिक्ष में
भाव भरो, निष्काम
लगाऊँ क्या तेरा अनुमान ?
न तुझसा कोई प्रतिभावान

महाभाग्योदय हुआ है आज
न छोड़ूँ तेरा दयामय साथ
मैं पावन हृदयासन पर तुम्हें बिठाऊँ
पुरूहुत पवमान
लगाऊँ क्या तेरा अनुमान ?
न तुझसा कोई प्रतिभावान

कामना-मल से रहित हूँ आज
हृदय में भरो प्रभूत-प्रकाश
मेरा मन सर्वभाव से सोम हुआ है
दूर हुआ अभिमान
लगाऊँ क्या तेरा अनुमान ?
न तुझसा कोई प्रतिभावान
हुआ मोहित तव देख स्वरूप
कोई क्या करे तेरा उपमान
लगाऊँ क्या तेरा अनुमान ?
हे प्राण !!
प्रभु प्राण !!
मेरे प्राण !!! मेरे प्राण

हे प्राण !!
प्रभु प्राण !!
मेरे प्राण !!! प्रभु प्राण

रचनाकार व स्वर :- पूज्य श्री ललित मोहन साहनी जी – मुम्बई
तर्ज :- कहाँ तुम खो गये मेरे राम (अदिति)
शीर्षक :- आत्मानन्द रसपान
राग : भैरवी

अनुमान = अन्दाजा
प्रतिभावान = मेधावी, बुद्धिमान
उपमान = तुलना, बराबरी
विहार = घूमना फिरना
अवमान = तिरस्कार
मनोरथ = आशंसा, सङ्कल्प
कामना = मन की इच्छा
पुरूहुत = बहुतों द्वारा पुकारे जाने वाले
पवमान = अत्यन्त पवित्र
प्रभूत = विपुल, विस्तृत, विशाल, अत्यधिक
सोम = शान्त, अमृत तुल्य