हे प्रभु !! सत्य-वाणी शुभ-कर्मों से तेरी स्तुति करूँ
ओ३म् तत्त्वा॑ यामि॒ ब्रह्म॑णा॒ वन्द॑मान॒स्तदा
शा॑स्ते॒ यज॑मानो ह॒विर्भि॑: ।
अहे॑ळमानो वरुणे॒ह बो॒ध्युरु॑शंस॒ मा न॒
आयु॒: प्र मो॑षीः ॥
ऋग्वेद 1/24/11
हे प्रभु !! सत्य-वाणी शुभ-कर्मों से
तेरी स्तुति करूँ
हे सर्वव्यापक!!, बोध तुझसे,
पाके सत्कर्मी बनूँ
मैं करूँ शुभ-आचरण,
शुभ-कर्म में बीते जनम
प्रार्थना करना न मेरी अनसुनी,
करना श्रवण
तू सदा से अग्रणी,
मैं तेरा अनुगामी बनूँ
हे प्रभु !! सत्य-वाणी शुभ-कर्मों से
तेरी स्तुति करूँ
परम स्तुत्य प्रभु जी तुमसे,
पूर्ण आयु प्रदान हो
असमय जीवन ना जाये,
ऐसा प्रभु वरदान दो
शुद्ध पावक आचरण से,
निज सफल जीवन करूँ
हे प्रभु !! सत्य-वाणी शुभ-कर्मों से
तेरी स्तुति करूँ
यज्ञभाव स्वरूप मेरी,
आहुति स्वीकार हो
भक्ति-भाव की आहुति,
तेरे लिए कर्तार हो
आके प्रभु तेरी शरण में,
प्राप्त तुझको मैं करूँ
हे प्रभु !! सत्य-वाणी शुभ-कर्मों से
तेरी स्तुति करूँ
हे सर्वव्यापक!!, बोध
तुझसे पाके सत्कर्मी बनूँ
रचनाकार व स्वर :- पूज्य श्री ललित मोहन साहनी जी – मुम्बई
राग :- पटदीप
तर्ज :- सांग तू माझाच ना / ताप रूपक
शीर्षक : प्रभु ! शुभ कर्मों के लिए
पूर्ण आयु प्रदान करो










