बचा ले अपनी जीवन नैया यात्री आत्मा भोले रे
बचा ले अपनी जीवन नैया
यात्री आत्मा भोले रे
पाप के छेद हैं नाव में तेरी
आई भँवर बिन बोले रे
कर दी नाव पुरानी मूरख
सद्गुण से ना साधी रे
खा गए लकड़ी दुर्गुण दीमक
डूबन से अब डोले रे ?
कुटिल मार्ग मृत्यु का द्योतक
याज्ञिक जीवन अमृत रे
पाले देव मार्ग शिव-सुख का
रखना अमृत घोले रे
रहे अविद्या दु:ख ही दु:ख है
विद्या में सुख आनन्द रे
विषय विकार छोड़ मद मोह को
परमेश्वर का होले रे
रचनाकार :- पूज्य श्री ललित मोहन साहनी जी – मुम्बई
स्वर :- श्रीमती अदिति जी शेठ
तर्ज :- तरुन गेले दिन मधले सखी
द्योतक = दिखलाने वाला
याज्ञिक = निष्कामी










