आया हूँ तेरे दर पे भक्तिपाव को लिए

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आया हूँ तेरे दर पे भक्तिपाव को लिए

तर्ज : यूँ हसरतों के दाग

आया हूँ तेरे दर पे भक्तिपाव को लिए
दस्तक मैं दे रहा हूँ प्रभु द्वार खोलिए ॥
जीवन में कितने कर्म भले और बुरे हुए
अन्जाने में कुछ और जानबूझ के किए
है आपकी खुशी प्रभु कैसे भी तोलिए ॥ दस्तक मैं…

होठों पे ओउम नाम है वो मन में भी रहे
चातक के जैसी प्यास वही हूबहू रहे
धागा है ध्यान ओ३म के मोती पिरो लिए। ॥ दस्तक मैं…

जागा हूँ मैं जीवन में चाहे देर से भले
आशा के दीप कुछ तो मेरे मन में भी जले
अज्ञान वश जीवन में बहुत देर सो लिए ॥ दस्तक मैं…