लागी रे लगन मुझको प्रभु के मिलन की

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लागी रे लगन मुझको प्रभु के मिलन की

तर्ज: चली रे चली रे मैं तो देस पराए

लागी रे लगन मुझको प्रभु के मिलन की
प्रभु की कृपा बिन न मुक्ति जीवन की ॥ लागी रे…

न देना प्रभु मोह-माया में फँसने
भटकने लगूँ तो मुझे करना बस में
न जानूँ प्रभु रीत मन के दमन की ॥ लागी रे…

ना पापों से मन जाए कभी अनुपतन में

हो मन ‘सुमना’ जाए धर्माचरण में
रहे मन में वृत्ति तेरे अनुसरण की ॥ लागी रे…

जहाँ तू रखे दाता खुश हूँ जीवन में

खिजा खार निर्जन सहर या चमन में
जहाँ भी रहूँ बनके धूल चरण की ॥ लागी रे…

जनम चक्र में घूमता ही रहा हूँ
समझ ना सका दाता मैं कब कहाँ हूँ
न इच्छा प्रभु मुझको आवागमन की ॥ लागी रे…

रहे याद तेरी प्रभु दुःख या सुख में
न मैं मैं रहूँ और समाऊँ में तुझमें
न तन की रहे सुध, रहे सुध न मन की ॥ लागी रे…

जो होवें विदा प्राण जब मेरे तन से
प्रभु नाम निकले मेरे मुख से मन से

है मुझको प्रभु आस तेरी शरण की ॥ लागी रे…

(खिजाँ) पतझड़ (सुमना) अच्छे मनवाला (अनुसरण) पीछे जानेवाला (धर्माचरण) धार्मिक, धर्म का

आचारण (सदुप्रदेश) सत्य का उपदेश