कही मान मेरे भरतार वापिस सिया राम को दे।
(मन्दोदरी का रावण को सुझाव)
कही मान मेरे भरतार वापिस सिया राम को दे।
ऋषियों ने स्त्री पराई,
सबके लिए मां बहन बताई।।
बुराई कर रहा कुल संसार,
वापिस सियाराम को दे।।1।।
बन में राम लंक में सिया,
अशोक में शोक सिया को दिया।
किया पिया तैने जुल्म अपार,
वापिस सिया राम को दे।।2।।
जो सीता यहां रह जागी,
तो तेरी लंका नगरी ढह जागी ।।
बह जागी खून की धार,
वापस सिया राम को दे।।3।।
सीता की आंसू की गैस,
करें तेरी नगरी को तहस नहस।
बहस में ‘प्रेमी’ मान जाओ हार,
वापस सिया राम को दे।।4।।










