अंगूठी ने सीता जी की जब हालत बेढंगी की।

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अंगूठी ने सीता जी की जब हालत बेढंगी की।

अंगूठी ने सीता जी की
जब हालत बेढंगी की।
करुण क्रंदन को लखकर
छाती धड़की बजरंगी की।।

बड़ी तेजी के साथ वीर
उस पेड़ के नीचे आया है।
हाथ जोड़कर सीता जी को
सारा भेद बताया है।।

राम की हालत सुन करके
आंसू आंखों से बहाने लगी।
पास बैठाकर हनुमान को
धैर्य धर समझाने लगी।।