सिया रोई जार,जार बहे आंसुओं की धार।

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सिया रोई जार, जार बहे आंसुओं की धार।

(अशोक वाटिका में सीता जी का विलाप)

सिया रोई जार,
जार बहे आंसुओं की धार।
मेरी सुनो पुकार,
राम से कोई मिला दो।।
रावण पापी तेरा सर्वनाश हो,
तेरी लंका में कव्वों का वास हो।
मुझे देके कारागार,
करी जिन्दगी बेकार।
मेरी सुनो जी पुकार,
राम से कोई मिला दो।।1।।

बिन सिया के जिन्दगी पिया की,
बिन पिया के जिन्दगी सिया को।
बचनी हो गई दुश्वार,
पड़ी मुसीबत अपार।
मेरी सुनो ही पुकार,
राम से कोई मिला दो।।2।।

इकली जीकर क्या जग में करूंगी,
बिन पिया के रो रो मरूंगी।
पति पत्नी का प्यार,
आज हो रहा है ख्वार।
मेरी सुनो जी पुकार,
राम से कोई मिला दो।।3।।

यदि सुनता हो कोई मेरी बात को,
जाकर कह दो मेरे प्राणनाथ को।
कर दें लंका को विस्मार,
‘प्रेमी’ ला रहे क्यों वार।
मेरी सुनो जी पुकार,
राम से कोई मिला दो।।4।।