महाराजा लड़ाई से भाग आया री
(धुन दो हंसों का जोड़ा)
महाराजा लड़ाई से भाग आया री,
जुल्म कियो रानी, गजब ढायो री।। टेक ।।
भागकर युद्ध से महाराज छिपने घर आया,
दाग माथे पै कायरता का लगाकर आया,
नगर में एक भारी मातम सा छाया,
हुई चिन्तित सभी प्रजा ने ना पीया खाया,
मुझे एक सिपाही ने बताया री,
जुल्म भयो…।।1।।
आज तक सबसे ऊंची शान इस खानदान की थी,
क्योंकि जिन्दगी भी आन बान शान की थी,
आज जो दाग लगा उसको मिटायें कैसे,
हुई जो भूल उसे दिल से भुलायें कैसे,
चिन्ता में चित्त मेरा चकरायो,
री जुल्म भयो…।।2।।
महामाया कहने लगी लेकर ठंडी स्वास,
बांदी तेरी बात पर कैसे करूं विश्वास।
यह तो सत्य मैं मान भी लूं,
यदि कोई सखी यह कहती है,
पश्चिम में भान निकल आया
उत्तर को गंगा बहती है।
स्थान छोड़ दे ध्रुव भी
नहीं क्षत्री रण को छोड़ेंगे,
अपने कुल की मर्यादा को,
स्वप्न में भी नहीं तोड़ेंगे।
महामाया के कान में आई फिर आवाज,
युद्ध से आये भागकर यशवन्त सिंह महाराज।










