हाड़ी रानी एक सेनानी के जीवन की बात को

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हाड़ी रानी एक सेनानी के जीवन की बात को

हाड़ी रानी एक सेनानी के जीवन की बात को,
तू सब पहचाने है मौजूदा हालात को।। टेक ।।

क्षत्री जब जाये जंग में,
तब शस्त्र बांधे अंग में,
इसी लिए रंग में भंग करके,
चला हूं वीरों के ढंग में,
शादी का कंगन नहीं सोहता
शस्त्रों वाले हाथ को ।।1।।

एक देवी ने पुकारा है,
गैरत को ललकारा है,
निःसहायों की सहायता
करना मुख्य धर्म हमारा है,
रण चण्डी इम्तहान हमारा
लेवे कल रात को।।2।।

यूं जंगी लिबास में,
आया तेरे पास में,
मेरे बाद क्या करेगी
रानी चाहता हूं विश्वास में,
संध्या में परिणित मत कर देना
जीवन प्रभात को ।।3।।

विदा करो मैं जाता हूं,
विजय श्री ले आता हूं,
जाते-जाते प्रेमी कुछ
कर्तव्य की याद दिलाता हूं,
हंसते-हंसते हर लेना हृदय के
हर आघात को।।4।।

चूड़ा वत की बात सुन हाड़ी हुई उदास,
भीरूता भरतार की भद्दा करें इतिहास ।।

जाना था जंग भूमि में,
आ गये रंग भूमि में,
जीवन की नैया डोली,
संभली साजन से बोली ।।